Roza Rakhne ki Dua aur Iftaar Kholne ki Dua in Hindi, English

रोज़ा रखने और खोलने की दुआ इन हिंदी

मुसलमान भाइयों का सबसे पाक महीना रमजान का महीना होता है । एक महीने तक रोजा रखने के बाद ईद पर्व मनाया जाता है। वही पिछले कुछ सालों से इस पाक महीने को लेकर सोशल मीडिया पर एक बहस छिड़ गई है कि इस पाक महीने को रमजान कहते हैं या फिर रमादान तो ऐसे में मैं आपको बता दूं कि रमादान कहिए या फिर रमजान दोनों ही सही है। इसमें बस फर्क इतना है कि ये अरबी भाषा का शब्द है तो वही दूसरा उर्दू और फारसी भाषा से लिया गया शब्द है। हम इस पोस्ट के ज़रिये आपको Roza Rakhne ki Dua hindi mein और Roza kholne ki dua hindi mein या इफ्तार करने की दुआ (Iftaar krne ki Dua in Hindi) provide kar रहे हैं। आप इसको रोज़ा रखते समय और इफ्तार करते समय पढ़ सकते हैं।  

इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक मुसलमानों का ये सबसे पवित्र महीने को अरबी भाषा में रमादान के नाम से जाना जाता है।वही उर्दू और फारसी भाषा में इसे रमजान कहते हैं ।ये मूल रूप से अरबी भाषा में रमादान ही है , लेकिन फारसी और उर्दू में ‘द’ के स्थान पर ‘ज’ इस्तेमाल होने लगा।

रमजान के महीने को रहमतों-बरकतों का महीना माना कहा जाता है। सुबह के समय आपको रमजान के दौरान रमजान आया है, रमजान आया है….रहमतों-बरकतों  का महीना आया है।ऐसे सुंदर कव्वाली इसी माह में सुनाई देती है। रमजान के समय में ही लोग नेकी खूब किया करते हैं ये पाक महीना साल में पूरे एक साल बाद आता है और इसका हर मुसलमान भाई बड़ी ही बेसब्री से इंतजार करते हैं।बच्चे से लेकर बड़ों में रोजा रखने की जबरदस्त उत्साह देखा जाता है। रमजान का महीना बेहद खास होता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि रमजान के महीने में अल्लाह की रहमत उनके नुमाइंदों पर बरसती है। इसी पाक महीने में मुसलमान अपने चाहतों पर नकेल कस के सिर्फ और सिर्फ अल्लाह की इबादत लग जाते हैं।

रमजान महीने का महत्व – Importance of Ramzaan

रमजान महीने का मुसलमान भाइयों के लिए विशेष महत्व होता है क्योंकि इस महीने में अल्लाह की रहमत बरसती है ये उनके लिए सब्र का महीना होता है।ये बात कहा तक पक्की है इसका पता इनकी धार्मिक और पाक पुस्तक कुरआन में किया गया है।रमजान करीम में साफ तौर पर जिक्र किया गया है कि रमजान के इस पाक महीने में दुनिया का हर मुसलमान भूखा प्यासा रहकर 30 दिन तक बड़ी शिद्दत से रोजा रखता है। रमजान को छोड़कर बाकी दिनों में इंसान का पूरा का ध्यान अपने खाने -पीने और शारीरिक रूप से होने वाली जरूरतों पर लगा रहता है लेकिन असल चीज तो उसकी रूह है और इसकी पाकीज़गी के लिए अल्लाह ने ये खास महीना रमजान बनाया है।

रमजान  महीने में रोजा रखने की नियत (Roza Rakhne ki Niyat)

नियत का सीधा मतलब इरादा रखने से होता है।इस्लाम धर्म में नियत को तवज्जो दिया जाता है ,क्योंकि बगैर नियत के नमाज़ कबूल नहीं होती और ना ही रोजा। जो कोई भी रमजान के महीने में रोजा रखता है। वो रात के समय में ही पहले इसकी नियत रखता है कि वो कल रोजा रखेगा सुबह के दौरान सहरी में उठने की नियत करके सोना भी रोजे की नियत में आती है। वहीं अगर कोई मुसलमान भाई रात में नियत करना भूल जाता है। तो वो ऐसे में सहरी के दौरान  भी रोजे की नियत कर सकता है। मगर अगर उसने अपने रोजा रखने से पहले इरादा नहीं बनाया तो उसे रोजा रखने का कोई फायदा नहीं मिलेगा क्योंकि बिना Roza Rakhne ki Niyat के दिन भर भूखे प्यासे रहने से भी अल्लाह रोजा कबूल नहीं करते।

रोजा रखने की दुआ (roze ki dua) कब करनी चाहिए ?

 इस्लाम धर्म में हर एक काम को करने से पहले दुआ पढ़ने का चलन है।फिर चाहे वो खाने से पहले की दुआ हो अथवा घर से बाहर जाने के दौरान की गई की गई दुआ हो ऐसे ही रमजान की दुआ यानी कि रमजान में रोजा रखने से पहले भी हर मुसलमान भाई दुआ (roze ki dua) पढ़ना बेहद जरूरी समझता है और ऐसा मानना है कि बिना दुआ पढ़ें रोजा कुबूल नहीं माना जाता।सहरी खाने के बाद यानी की इफ्तार खोलने के बाद(Iftar kholne ki dua ) सभी मुसलमान भाइयों को सुबह की नमाज से कम से कम 10 मिनट पहले ही दुआ (Ramzan ki Dua) पढ़ लेना चाहिए।जैसा की मैंने पहले बताया की रोजा रखने के दौरान मुस्लिम भाई जब कुछ खाने पीने की सोचते है तो उससे पहले भी उन्हें दुआ करनी पड़ती है इसी को  Iftar karne ki dua कहते है।

रोज़ा रखने की दुआ – Roza Kholne ki Dua

हिंदी में रोज़ा रखने की दुआ (Roza Rakhne ki Dua)

‘’व बि सोमि गदिन नवई तु मिन शहरि रमजान’’

इंग्लिश में रोजा रखने की दुआ (Roza Rakhne ki Dua)

“Wa bisawmi ghadin nawaitu min shahri ramadan”

अरबी में रोजा रखने की दुआ (Roza Rakhne ki Dua )

وَبِصَوْمِ غَدٍ نَّوَيْتُ مِنْ شَهْرِ رَمَضَانَ.

हिंदी में दुआ का मतलब

मैंने रमजान के कल के रोजे की नीयत की।

रोजा खोलने की नीयत (Roza Kholne ki Niyat ) का रमजान महीने में महत्व

रोजा रखने की नियत के जैसे ही रोजा खोलने की नियत रखना भी बेहद जरूरी होता है। नियत के लिए महज लफ्जों का होना आवश्यक नहीं है। हालांकि लफ्जों में नियत करना सही समझा जाता है ।अगर आपने दोपहर में नियत कर ली जाए की इफ्तार में मेरा मेरा रोजा पूरा हो जाएगा तो इसका हरगिस मतलब नहीं होता कि आप उसी दौरान खाना खाना शुरु कर दे ।ऐसा करने से मुसलमान भाइयों का रोजा टूट जाएगा और उन्हें रोजे का कोई सवाब नहीं मिल सकेगा। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि हर दिन रोजा रखने व खोलने की नियत (Roza Kholne ki Niyat ) का बेहद अधिक महत्व नहीं है।अलबत्ता वो रोजा रखने या खोलने का इरादा रखने के स्थान पर रमजान की शुरुआत में पूरे महीने रोजा रखने की नियत कर बैठते हैं।वही सही लिहाज से हर दिन नियत करना सही माना जाता है।

रमजान के महीने रोजेदार को रोजा खोलने की दुआ (Roza kholne ki Dua) क्यों करनी चाहिए ?

रमजान के पाक महीने में रोजा रखने की दुआ(roza kholne ki dua in hindi) पढ़ना बेहद जरूरी है। ठीक वैसे ही शाम में इफ्तार करने के दौरान भी रोजा खोलने की दुआ भी जरूरी मानी जाती है ।जब इफ्तार का समय हो जाए तो कुछ भी खाने व पीने से पहले मुसलमान भाइयों को और रोजा खोलने की दुआ(roza kholne ki dua in hindi) को जुबानी तौर पर पड़ना चाहिए और उसके बाद ही कुछ खाना पीना शुरू करें।

रोजा के दौरान कौन सी दुआ मांगी जाती है ?

रोजा के दौरान हर मुसलमान भाई यही दुआ करता है की ‘ऐ अल्लाह ,मैंने तेरी ही रजामंदी के लिए रोजा रखा और तेरी रिज़्क पर इफ्तार भी किया’ इस तरह से आप Roja kholne ki dua in hindi दुआ का हिन्दी में मतलब समझ गए होगे।

रोजेदार का रोजा रखने का तरीका( Roja Rakhne ka Tarika)

सुबह के दौरान यानी फज्र की नमाज से पहले खाना खाने के समय को सहरी कहते हैं ।रमजान के महीने में हर दिन रोजा रखने से पहले शहरी खाई जाती है। इस्लाम धर्म में सहरी करना सुन्नत माना जाता है

 वही रोजा रखने का एक तय समय निर्धारित होता है ।अगर आप तय समय पर सहरी नहीं खाते तो वह रोजा नहीं माना जाता।रोजा रखने के दौरान दिन भर में कुछ भी खाने में पीने की सख्ती से मनाही होती है।इस्लाम धर्म के अनुसार पानी का एक घूंट पीने या सिगरेट की एक फूंक लेने से भी रोजा टूट जाता है। रमजान के दौरान केवल भूखा प्यासा रहना काफी नहीं माना जाता बल्कि रोजेदार को खाने पीने के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए। इसके साथ ही इस दौरान झूठ बोलने, झूठी कसम खाने ,चुगली करने और लालच जैसे बुरे काम करने से दूर रहना चाहिए।रमजान के पाक महीने में हर रोजेदार को कुल 5 समय की नमाज अदा करनी चाहिए।इसका जिक्र कुरान में किया गया है।

रोजा खोलने की नीयत – Roza Kholne ki Niyat

हिंदी में रोजा खोलने की दुआ

अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुमतु, व-बिका आमन्तु, व-अलयका तवक्कालतू, व- अला रिज़क़िका अफतरतू ” 

इंग्लिश मे रोजा खोलने की दुआ

“Allahumma Inni Laka Sumtu wa Bika Aamantu wa ‘Alayka Tawakkaltu wa ‘Ala Rizq-Ika Aftarthu.”

अरबी में रोजा खोलने की दुआ

اَللّٰهُمَّ اِنَّی لَکَ صُمْتُ وَبِکَ اٰمَنْتُ وَعَلَيْکَ تَوَکَّلْتُ وَعَلٰی رِزْقِکَ اَفْطَرْتُ.

दुआ का हिन्दी में मतलब

अल्लाह के नाम से, जो रहम करने वाला है, जो दयालु है। हे अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोज़ा रखा और तुझ पर ईमान लाया और तुझ पर भरोसा किया है और तेरे रिज़्क से इफ्तार किया |

सहरी के दौरान क्या खाए ?

वही रमजान के महीने में मुसलमान भाइयों की डाइट में शामिल करने वाले आहार का जिक्र करें तो वह सहरी के दौरान अपने आहार में कार्बोहाइड्रेट ,फाइबर और प्रोटीन से युक्त चीजें शामिल करें क्योंकि इससे उनके शरीर में एनर्जी लेवल बना रहेगा।रोटी, चावल और आलू में कार्बोहाइड्रेट प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।वही फलों में सेब, केला ,खुबानी ,छोले और ओट्स में फाइबर प्रचुर मात्रा में पाई जाती है। इसके अलावा प्रोटीन के रूप में आप दूध, अंडे, दही और दाल को शामिल कर सकते हैं

रोजेदार का रोजा खोलने का तरीका (Roja  Kholne ka Tarika)

जैसा कि आप जानते होंगे कि रोजा खोलने के समय को इफ्तार कहते हैं। ये सूरज ढलने के बाद शुरू होता है। करीब 14 साल पहले पैगंबर मोहम्मद खजूर और पानी को अपना रोजा खोलते थे।तब से लेकर अभी तक हर मुसलमान भाई रोजा खोलने के लिए यही तरीका अपनाते हैं। इसके बाद मगरीब की नमाज अदा करने के बाद इफ्तार पार्टी में दोस्तों, करीबी रिश्तेदार को शामिल करते है। इफ्तार में खाना खाने से पहले आपको चाहिए कि खुद को हाइड्रेट कर ले ।इसके लिए आप चाहे तो पानी , जूस,सूप आदि का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा तरबूज,संतरा, खीरा, सूप डाइट में शामिल किया जा सकता है।

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