Namaz Padhne ka Tarika Step by Step in Hindi

नमाज पढ़ने का सही तरीका | Namaz Padhne ka Sahi Tarika in Hindi Step by Step

दुनिया के हर एक कोने में इस्लाम धर्म को मानने वाले मौजूद है, इस्लाम में सभी मुस्लिम भाई या बहन को नमाज अदा करना सबसे ज्यादा जरुरी होता है, इसीलिए सभी मुस्लिमो को पांच वक़्त की नमाज अदा करनी चाहिए| अगर कोई भी मर्द या औरत नमाज अदा नहीं करता है तो उसे गुनहगार माना जाता है, हालांकि सभी मुसलमानो को नमाज पढ़ने का तरीका पता होता है लेकिन कुछ इंसान ऐसे होते है जिन्हे नमाज पढ़ने का सही तरीकाnamaz padhne ka tarika step by step ) मालूम नहीं होता है| इस्लाम धर्म में पांच स्तंभों में से एक स्तंभ नमाज़ को माना गया है, इसीलिए सभी को पांचो वक़्त की नमाज़ जरूर पढ़नी चाहिए

ऐसे सभी इंसान जिनकी उम्र सात साल से ज्यादा है और जिन्होंने कलमा पढ़ा है उन सभी को नमाज अदा करना जरुरी है| आज के समय में कुछ मुसलमान ऐसे भी है जो दुनिया के कामों के लिए नमाज को छोड़ देता है या नमाज के समय बहाना बना देता है, ऐसे इंसानो को नमाज की अहमियत के बारे में बताना चाहिए| लेकिन ऐसे इंसान भी काफी है जिन्हे नमाज़ पढ़ने का सही तरीका मालुम नहीं होता है अगर आप भी ऐसे इंसानो में शामिल है तो हमारा यह पेज आपके लिए फायदेमंद साबित होगा| हम अपने इस लेख में नमाज़ पढ़ने का सही तरीका (namaz padhne ka sahi tarika in hindi) बताएंगे, चलिए सबसे पहले हम आपको नमाज पढ़ने से पहले कया करना चाहिए इसके बारे में जानकारी उपलब्ध करा रहे है –  

नमाज़ की शर्ते कौन कौन सी है?

यह तो हम सभी जानते है की नमाज़ अदा करना सभी के लिए जरुरी है, लेकिन अगर आपको नमाज़ पढ़ने का तरीका (namaz padhne ka tarika) नहीं पता है तो आपकी नमाज पूरी नहीं मानी जाती है| लेकिन कई आपको पता है की नमाज पढ़ने की कुछ शर्ते भी होती है अगर आप उन्हें पूरे किए बिना नमाज पढ़ते है तो ना तो आपकी नमाज़ कबूल होगी और आप गुनहगार भी माने जाते है| चलिए अब हम आपको नमाज की शर्तो के बारे में जानकारी उपलब्ध करा रहे है|

नमाज पढ़ने वाले इंसान का बदन का पाक होना

ऐसा कोई भी इंसान जो नमाज पढ़ने जा रहा है उसका बदन पूरी तरह से पाक होना बहुत ज्यादा ज़रूरी होता है। अगर आपके बदन पर किसी भी तरह की नापाकी लगी हुई है तो आपको नमाज पढ़ने बिलकुल भी नहीं जाना चाहिए| बदन पर नापाकी लगे होने पर सबसे पहले वजू या गुस्ल करके बदन से नापाकी हटा कर बदन को पाक करके फिर नमाज़ पढ़ने जाना चाहिए।

कपड़ो का पाक और साफ होना

नमाज पढ़ने जाने वाले इंसान ने जो कपड़ें पहन रखें वो कपड़ें पूरी तरह से पाक होने चाहिए, अगर आपके कपड़ो पर किसी भी प्रकार की नापाकी या गन्दगी नहीं लगी होनी चाहिए अगर नापाकी या गंदगी लगी हो तो सबसे पहले कपड़ो पर लगी नापाकी को धो लें| अगर धोने से भी वो साफ नहीं हो रही है तो दूसरे साफ कपड़ें पहन कर नमाज अदा करनी चाहिए

नमाज़ पढने की जगह पाक होनी चाहिए 

आप जिस जगह पर भी नमाज पढ़ना चाहते है वो जगह पूरी तरह से साफ और पाक होनी चाहिए, अगर आप जिस जगह पर नमाज पढ़ना चाहते है वहां पर किसी भी तरह की गन्दगी या नापाकी लगी हुई है तो उस जगह को पहले अच्छी तरह से धो कर साफ कर लें| फिर उस साफ की हुई जगह पर नमाज पढ़ लें या अगर आपके पास पानी मौजूद नहीं है तो किसी दूसरी साफ और पाक जगह पर नमाज पढ़ लें|

 नमाज पढ़ने वाले शख्स के बदन के सतर का छुपा हुआ होना 

मर्दो के नमाज पढ़ने का तरीका (namaz padhne ka tarika in hindi) औरतो से अलग होता है, मर्द के शरीर में नाफ़ के निचे से लेकर घुटनों तक के हिस्से को मर्द का सतर कहा गया है। जब कोई मर्द नमाज अदा करने जाता है तो उसे इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए की नमाज पढ़ने वाले शख्स का सतर दिखना नहीं चाहिए, अगर मर्द का यह हिस्सा खुला या दिखाई दे रहा है तो ऐसे में नमाज पढ़ना सही नहीं माना जाता है|

नमाज़ के वक्त पर नमाज अदा करना 

इस्लाम में पांचो वक्त की नमाज का वक़्त तय होता है और सभी मुसलमानो को उस तय वक्त पर ही नमाज पढ़नी चाहिए| अगर आप उस तय वक्त में नमाज नहीं पढ़ते है तो तय वक़्त से पहले कोई भी नमाज नहीं पढ़नी चाहिए और अगर कोई भी शख्स तय वक़्त के बाद नमाज पढ़ता है तो उस नमाज को कज़ा नमाज़ कहा जाता है

नमाज अदा करते समय मुंह किबले की तरफ होना

नमाज पढ़ते समय शख्स का मुंह किस तरफ होना चाहिए यह जानना भी बहुत जरुरी है क्योंकि अगर आप सही तरफ मुंह करके नमाज नहीं पढ़ते है तो आपकी नमाज पूरी नहीं मानी जाती है| अगर आप मस्जिद में नमाज पढ़ रहे है तो आपको इस बारे में फिकर नहीं करनी चाहिए लेकिन अगर आप अकेले किसी जगह पर नमाज पढ़ रहे है तो आपको क़िबले की तरफ मुंह करके नमाज पढ़नी चाहिए

गुस्ल करने का तरीका 

नमाज पढ़ने से पहले ग़ुस्ल करना भी जरुरी है लेकिन ग़ुस्ल करना ऐसे शख्स के लिए जरुरी है जिसने रात में अपनी बीवी से सोहबत करी है या फिर रात में जिसे अहेतलाम हुआ हो या जो शख्स लंबे अरसे से नहाया ना हो तो आपको गुस्ल जरूर करना चाहिए| ऐसे इंसानो को वजू करने से पहले ग़ुस्ल करना चाहिए अगर आपको गुस्ल करने का तरीका मालुम नहीं है तो अब हम आपको ग़ुस्ल करने के तरीके के बारे में बता रहे है

A – सबसे पहले दोनों हाथो को अच्छी तरह कलाहियो तक धो लें|

B – फिर शख्स को अपनी शर्मगाह पर पानी डाल कर अच्छी तरह से धो लें|

C – बस इसके बाद आपको वो सारी चीजे करनी है जो वजू में की जाती है|

ऊपर आपने गुस्ल करने का तरीका जाना, लेकिन ग़ुस्ल में भी आपके एक बात का खास ख्याल रखना है की ग़ुस्ल करते समय शरीर के हिस्से पर तीन बार से ज्यादा पानी नहीं डालना है

वजू का तरीका – Wuzu Ka Tarika in Hindi

नमाज़ पढ़ने से पहले वजू करना बहुत ज्यादा जरुरी बताया गया है और वजू किए बिना आप नमाज़ नहीं पढ़ सकते है। लेकिन अगर कोई भी शख्स बिना बाजु किए नमाज पढ़ता है तो वो सही नहीं मानी जाती है, कुछ शख्स ऐसे भी होते है जिन्हे वजू का सही तरीका मालूम नहीं होता है| अगर आपको भी वजू करने का तरीका मालूम नहीं है तो परेशां ना हो अब हम आपको वजू का तरीका बता रहे है| वजू शुरू करने से पहले शख्स को बिस्मिल्लाह कहना चाहिए उसके बाद निम्न तरीके से वजू करे।

A – वजू करने वाले शख्स को सबसे पहले कलाहियों तक हाथ धोने चाहिए

B – फिर अच्छी तरह से कुल्ली कर लें|

C – चेहरा अच्छी तरह से धो लें|

D – दाढ़ी में खिलाल जरूर कर लें|

E – फिर दोनों हाथो को कोहनियो तक धोंये

F – एक बार सिर और कानों का मसाह जरूर करना चाहिए, मसाह करने के लिए सबसे पहले अपने हाथो को पानी से गिला करके अपने सिर और दोनों कानों पर फेर लें। उंगलियो से कानों को अंदर बाहर से अच्छी तरह साफ़ कर लें|

G – दोनों पांवो को टखनों तक अच्छी तरह से धो लें|

ऊपर हमने आपको वजू का तरीका बताया है, लेकिन वजू करते समय एक बात का खास ख्याल रखें की वजू करते समय हर हिस्से को कम से कम एक बार या ज़्यादा से ज़्यादा तीन बार धो सकते है, लेकिन मसाह केवल एक ही बार ही किया जाता है| अगर आप इससे ज्यादा धोते है तो ऐसा करने की इस्लाम में इजाज़त नहीं है क्योंकि अगर कोई ऐसा करता है तो यह पानी की बर्बादी मानी जाती है और अल्लाह रसूल ने पानी की बर्बादी करने से मना किया है।

नमाज़ की नियत होना 

अगर आप नमाज पढ़ने जा रहे है और आपकी नियत नमाज पढ़ने की नहीं है तो आपकी नमाज अधूरी मानी जाती है| इसीलिए ऐसे सभी शख्स को जो नमाज पढ़ने जा रहे है उनकी नियत या इरादा नमाज पढ़ने का होना जरुरी है

नमाज की नियत का तरीका – Namaaz ki Niyat ka Tarika

यह तो हम सभी जानते ही है की नमाज़ की नियत होना जरुरी है, नमाज की नियत का मतलब होता है की आपके दिल में नमाज अदा करने का इरादा होना चाहिए| अगर आपके दिल में नमाज अदा करने का इरादा है तो आपको नमाज जबान से पढ़ने की जरुरत नहीं है| लेकिन अगर आपके दिल में नमाज पढ़ने की नियत नहीं है तो आपके नमाज पढ़ने का कोई फायदा नहीं है

Namaaz Parhne ka Tarika in Hindi

नमाज पढ़ने तो सभी जाते है लेकिन अगर आपको नमाज पढ़ने का सही तरीका (Namaaz Parhne ka sahi tarika ) मालूम नहीं है तो आपकी नमाज कबूल नहीं होती है| नमाज 2 रकात या 3 रकात या 4 रकात की पढ़ी जाती है, एक रकात में एक क़याम, एक रुकू और दो सजदे किए जाते है, चलिए अब हम आपको नमाज पढ़ने का तरीका के बारे में बताते है 

सबसे पहले वजू करें और पाक कपड़े पहनकर पाक जमीन पर क़िबला की तरफ मुंह करके खड़े हो जाएं, फिर जब नमाज का समय हो जाएं तो सबसे पहले उस नमाज की नियत कर लें| फिर अपने दोनों हाथो को कानो की लौ तक उठाकर अल्लाह हु अकबरकहें| फिर अपने दोनों हाथो को नाफ के नीचे इस तरह रखें की बायाँ हाथ नीचे और दायाँ हाथ ऊपर रहे, इसके बाद आप सना सुबहा-न-कल्लाहम्म व् बि हम्दी- क व तबा-र-कस्मु-क व् तआला जद्दु-क व् ला इला-ह-गेरू-कपढ़ लें।

सना पढने के बाद तअव्वुज अऊजु बिल्लाह मिनश-शैतानीर-रजीम” पढ़ें और फिर तअव्वुज पढ़ने के बाद तसमिया “बिस्मिल्लाहिर्रहूमानीर्रहीमपढ़ें।

तसमिया पढ़ने के बाद सुरह अल्हम्द शरीफपढ़े और फिर वलज्जाल्लीन ” अलहम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन. अर्रहमान निर्रहीम. मालिकी यौमेद्दीन. इय्याका नाबुदु व इय्याका नस्तईन. इहदिनस सिरातल मुस्तकीम. सिरातल लजिना अन अमता अलैहिमगैरिल मग्ज़ुबी अलैहिम” पढ़ने के बाद आहिस्ता से आमीन बोलें|

फिर सुरह कौसर इन्ना आतय ना कल कौसरफसल्लि लिरब्बिका वन्हरइन्ना शानिअका हुवल अब्तरपढ़ें या जो भी सुरह आपको याद हो उसे पढ़ें, सुरह पढ़ने के बाद अल्लाह हु अकबरकहते हुए रुकू करने के लिए झुकें, रुकू में दाएं हाथ से दाएं घुटने को बाएं हाथ से बाएं घुटने को पकड़ने के बाद तीन, पांच या सात बार तस्बीह “सुबहा-न-रब्बियल अजीम” पढ़ें|

तस्बीह पढ़ने के बाद तसमीह समिअल्लाहु लीमन् हमिदहपढ़कर सीधे खड़े हो जाएं

सीधे खड़े होने के बाद तकबीर अल्लाहु अकबरकहते हुए सज्दे में जाएं, सजदे में जाने का तरीका -सबसे पहले अपने दोनों घुटने जमीन पर रखे उसके बाद अपने दोनों हाथ जमीन पर रखे, उसे बाद दोनों हाथो के बीच सबसे पहले नाक फिर माथा जमीन पर रखें|

फिर सज्दे में तीन, पांच या सात बार तस्बीह सुब्हाना रब्बीयल आलापढ़ें, उसके बाद तकबीर “अल्लाहु अकबर” कहते हुए उठे और सीधे बैठ जाए| फिर तकबीर “अल्लाहु अकबर” कहते हुएपहले की तरह ही दूसरा सज्दा करें और पहले सज्दे की तरह ही तस्बीह “सुब्हाना रब्बीयल आलाभी पढ़ लें|

सज्दा करने के बाद तकबीर “अल्लाहु अकबर” बोलते हुए जमीन पर बिना हाथ टेके खड़े हो जाए

आपकी एक रकात की नमाज पूरी हो गई है, इसके बाद आपको दूसरी रकात की नमाज अदा करनी है| दूसरी रकात अदा करने के लिए सबसे पहले आप तसमिया “बिस्मिल्लाहिर्रहूमानीर्रहीमपढ़ लें, इसके बाद सुरह अल्हम्द शरीफपड़ें और फिर सुरह ईखलास “कुलहु अल्लाहु अहद अल्लाहु समद लम यलिद वलम युअलद वलम या कुल्लहू कुफुअन अहद” या कोई और दूसरी सुरह जो भी आपको याद हो उसे पढ़ें|

सौराह इखलास पढ़ने के बाद रुकू करें और तीन, पांच या सात बार रुकू तस्बीह “सुबहा-न-रब्बियल अजीम”पढ़ें उसके बाद तसमीह समिअल्लाहु लीमन् हमिदहपढ़ लें, फिर सीधे खड़े हो जाए।

सीधे खड़े होने के बाद तकबीर अल्लाहु अकबरबोलते हुए सज्दे में जाए, फिर दो सज्दा करने के बाद बैठें, बैठने के बाद अत्तहिय्यातु लिल्लाहि वस्सलवातु वत्तैय्यिबातुअस्सलामु अलैक अय्युहन्नबिय्यु व रहमतुल्लाहि व बरकातुहुअस्सलामु अलैना व अला इबादिल्लाहिस्सालिहीनअश्हदु अल्लाइलाह इल्लल्लाहु व अन्न मुहम्मदन अब्दुहु व रसूलुहु।पढ़ लें और फिर दुरूद शरीफ “अल्लाहुम्मा सल्लिअला मुहम्मदिव वा आला आलि

मुहम्मदिन कमासल्लैता आला इब्राहीमा वा आला आलि इब्राहीमा इन्नाका हमीदुम  मजीद, अल्लाहुम्मा बारिक आला मुहम्मदिव वा आला आलि मुहम्मदिन कमाबारकता आला इब्राहीमा वा आला आलि इब्राहीमा इन्नाका हमीदुम मजीद” पढ़ लें उसके बाद दुरूद शरीफ के बाद की दुआ “अल्लाहुम्मा रब्बाना आतैयना फिददुनिया हसनतव वा फिल आखेरते बसनतव वाकीना अजाबन्नार” पढ़ें।

दुरूद शरीफ के बाद की दुआ पढ़ने के बाद सलाम फेरे, सलाम फेरने के लिए आप सबसे पहले दाएं तरफ मुंह मोड़ लें फिर उसके बाद मुंह को बाए तरफ मोड़ लें, दोनों तरफ मुंह मोड़ते समय अस्सलामु अलैकुम वा रहमतुल्लापढ़ें।

सलाम फेरने के बाद आप अपने दोनों हाथो को उठाकर सलाम फेरने के बाद दुआ मांगिए| अगर आपको सलाम फेरने के बाद की दुआ मालुम नहीं है तो हम आपको सलाम फेरने के बाद की दुआ के बारे में बताते है| सलाम फेरने के बाद सबसे पहले एक बार ऊँची आवाज में अल्लाहु अकबरबोलेन, फिर तीन बार अस्तगफिरुल्लाहबोलें, उसके बाद सलाम फेरने के बाद की दुआ अल्लाहुम्मा अन्तास्सलामपढ़ लें|

सलाम फेरने के बाद की दुआ पढ़ने के बाद 33 बार सुबहान अल्लाहफिर 33 बार अलहम्दु लिल्लाहऔर उसके बाद 34 बार अल्लाहु अकबर” पढ़ लें|

अंत में एक बार ला इलाहा इल्ललाहु वहदहू ला शरीका लहू लहुल मुल्कू वलहूल हम्दु वहुवा आला कुल्ली शैईन कदीरको पढ़ लें| उसके बाद आपको जो भी दुआ याद हो उसे पढ़ लें|

फिर अल्लाह पाक से मगफिरत करें और मुंह पर हाथ फेर लें|

पांच वक्त की नमाज में कितनी रकात होती है?

फजर की नमाज में कितनी रकात होती है? फजर की नमाज में 4 रकात होती है।
जोहर की नमाज में कितनी रकात होती है? जोहर की नमाज में 12 रकात होती है।
असर की नमाज में कितनी रकात होती है? असर की नमाज में 8 रकात होती है।
मगरिब की नमाज में कितनी रकात होती है? मगरिब की नमाज में 7 रकात होती है।
ईशा की नमाज में कितनी रकात होती है? ईशा की नमाज में 17 रकात होती है।
जुम्मे की नमाज में कितनी रकात होती है? जुम्मे की नमाज में 14 रकात होती है।

अज़ान और अज़ान के बाद की दुआ जरूर पढ़ें

इस्लाम में पांच वक्त की नमाज पढ़ने के लिए बताया गया है, नमाज से पहले अजान होती है| इसका मतलब यह है की आपको दिन में पांच बार अजान सुनने को मिलती है, अजान के सुनने के बाद अजान की दुआ जरूर पढ़नी चाहिए अगर आपको अजान के बाद की दुआ के बारे में जानकारी नहीं है तो आप हमारा दूसरा लेख पढ़ सकते है जिसमे हमने अजान के बाद की दुआ के बारे में बताया है

नमाज़ के फराइज या फर्ज 

नमाज पढ़ने से पहले इंसान को नमाज के फराइज के बारे में जानना बहुत जरुरी है, दरसल नमाज में कुछ चीजों को करना फर्ज होता है अगर आपने उन चीजों को छोड़ दिया तो आपकी नमाज कबूल नहीं होती है| नमाज में कुछ ऐसी चीजें बताई गए है जिन्हे फर्ज माना गया है और उन्हें आपको कभी भूलना या छोड़ना नहीं चाहिए, किसी भी कारणवश अगर आपने फर्ज वाली चीजों को छोड़ कर नमाज पढ़ ली है तो आपको फिर से फर्ज वाली चीजों के साथ नमाज पढ़नी पाती है| चलिए अब हम आपको उन चीजों के बारे में बताते है जो फर्ज में आती है  

1 – तकबीरे तहरीमा करना चाहिए।

2 – क़याम करना चाहिए।

3 – कीरअत करना चाहिए।

4 – रूकूअ करना चाहिए।

5 – सजदा करना चाहिए।

6 – क़ादा-ए-आख़ीरा करना चाहिए ।

7 – नमाज़ मुकम्मल करना चाहिए।

नमाज़ के मकरूहात

नमाज पढ़ने के दौरान काफी सारी चीजों को करने से मना किया गया है, अगर आप ऐसा कोई भी काम नमाज पढ़ते हुए करते है तो ना तो आपकी नमाज कबूल होगी और अल्लाह भी आपसे नाराज हो हो सकता है| अल्लाह की इबादत और रजा पाने के लिए हम नमाज पढ़ते है ऐसे में अगर हम कोई ऐसा काम कर दें जिससे अल्लाह नाराज हो जाएं तो आपकी नमाज बेकार हो जाती हैचलिए अब हम आपको ऐसी चीजों के बारे में जानकारी देती है जिन्हे नमाज के दौरान करना मना है – 

1 – नमाज पढ़ते समय कोख पर हाथ नहीं रखना चाहिए।

2 – नमाज पढ़ते समय कपडों के साथ खेलना नहीं चाहिए।

3 – कंकडिया हटाना भी मना है।

4 – कुछ इंसान कपड़े पर नमाज अदा करते है ऐसे में उन्हें इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए की कपड़े तस्वीर वाला नहीं होना चाहिए, अगर कपडे पर तस्वीर है तो उसे बदल लें|

5 – नमाज पढ़ते समय अंगडाई नहीं लेनी चाहिए।

6 – फ़ासिक मुअल्लिन के पीछे नमाज़ कभी नहीं पढ़नी चाहिए

मर्द के नमाज पढ़ने का तरीका (namaz ka tarika step by step for gents)

यह तो आप अच्छी तरह से जानते ही है की इस्लाम में पांचो वक़्त की नमाज अदा करने के लिए बताया गया है| पांचो वक़्त की नमाज मर्द और औरत सभी को अदा करनी होती है, हालाँकि औरत और मर्द की नमाज अदा करने के तरीके में थोड़ा फर्क होता है| ऊपर हमने जो नमाज पढ़ने का तरीका बताया है वो सभी काम या तरीके मर्द के होते है नीचे हम आपको औरत के नमाज पढ़ने के तरीका भी बता रहे है| इसीलिए अगर आपको मर्द के नामज पढ़ने का तरीका (namaz ka tarika step by step for gents) मालुम नहीं है तो ऊपर बताए गए सभी स्टेप्स को फॉलो करें|

औरतों की नमाज़ पढ़ने का सही तरीक़ा (namaz ka tarika step by step for ladies )

इस्लाम धर्म में मर्द और औरत दोनों को नमाज अदा जरूर करनी चाहिए, लेकिन औरत और मर्द की नमाज पढ़ने में थोड़ा सा फर्क है| पुरुष तो मस्जिद में जाकर नमाज के बारे में जान लेता है लेकिन औरते घर से बाहर नहीं जा पाती है ऐसे में उन्हें औरतो की नमाज पढ़ने का तरीका मालूम नहीं होता है| अगर आपको भी नमाज पढ़ने का तरीका नहीं पता है तो अब हम आपको औरत के नमाज पढ़ने के सही तरीके (namaz ka tarika step by step for ladies ) के बारे में जानकारी उपलब्ध करा रहे है –

औरत का वज़ू करने का तरीका 

मर्दो की तरह औरतो की भी नमाज पढ़ने से पहले वजू करना जरुरी है, औरतो का वजू करने का तरीका मर्द के वजू से थोड़ा अलग होता है| चलिए अब हम आपको औरतो के वजू करने के बारे में जानकारी उपलब्ध करा रहे है –

1 – यह तो हम सभी जानते ही है की औरते अपने हाथो में चूड़ियां, कंगन और अंगूठी पहने रहती है ऐसे उन्हें वजू करते समय ख्याल रखना चाहिए की वजू करते हुए पानी चूडियो और कंगन के नीचे भी पहुंचना चाहिए या चूडियो या कंगन को आगे पीछे करके पानी से अच्छी तरह से धो लें|

2 – अगर अंगूठी ढीली है तो उसे आगे पीछे करके अंगूठी के नीचे पानी अच्छी तरह से डाल लें और अगर अंगूठी बहुत ज्यादा टाइट या फिट है तो अंगूठी को निकाल कर पानी से अच्छी तरह धो लें|

3 – औरतो घर के काम करने पड़ते है, इसीलिए अगर आपके नाखूनों में आता लगा हुआ है या आता सुख गया है या किसी भी प्रकार की गंदगी लगी हुई है तो पहले उसे साफ़ करके हाथ धोएं

4 – नाखूनों पर नेल पॉलिश लगी हुई है तो उसे हटा दें क्योंकि अगर आप नेल पॉलिश नहीं हटाते है तो पानी नाखूनों के नीचे नहीं पहुंचेगा, ऐसे में ना तो आपका वजू होगा और ना ही नमाज मानी जाएगी|

ऊपर बताए गए सभी तरीको को सही से करें, अगर औरतो के हाथो के किसी भी हिस्से में पानी जाने से रह गया तो वजू पूरा नहीं होगा| इसीलिए औरतो को वजू करते हुए खास ख्याल रखना चाहिए

औरतों की नमाज़ के लिए क्या शर्त है? या औरतो की नमाज पढ़ने की कितनी शर्त होती है ?

मर्दो की तरह औरतो को भी नमाज अदा करने के लिए जरुरी शर्तो को करना होता है| अगर किसी भी औरत ने नीचे बताई गई शर्तो में से किसी भी एक शर्त को छोड़ दिया तो आपकी नमाज मानी नहीं जाती है| अगर आपको औरतो की नमाज की शर्तो के बारे में जानकारी नहीं तो चलिए अब हम आपको औरतो की नमाज के लिए शर्तो के बारे में जानकारी दे रहे है- 

बदन का पाक होना 

कपड़े का पाक होना

जगह का पाक होना

वक़्त का होना 

क़िब्ले की तरफ मुंह करके नमाज अदा करना 

नमाज़ की नीयत करना

सतर  का छुपाना 

तकबीरे तहरीमा कहना

कयाम करना

किरात करना

रुकु करना

सजदा करना

तशद्दुद  के हालत में बैठना 

औरतो की नमाज पढ़ने का सही तरीका – Namaaz Parhne ka Tarika for Ladies

ऊपर बताई गई सभी शर्ते मर्द और औरत दोनों की ही करनी होती है लेकिन इन्हे करने में थोड़ा सा फर्क होता है| चलिए अब हम आपको उन चीजों के बारे में बताते है जो मर्द की नमाज से अलग होती है-

तकबीर तहरीमा के लिए हाथ उठाने का तरीका 

तकबीर तहरीमा मर्द और औरत दोनों को करना होता है लेकिन दोनों के करने में थोड़ा सा फर्क होता है| दरसल मर्द को तकबीर तहरीमा में हाथ कानो की लौ तक उठाना होता है जबकि औरतो को केवल कंधो तक हाथो को उठाना होता है| लेकिन औरत को ख्याल रखना चाहिए की हाथ को दुपट्टे के अंदर करके ही उठाने है|

औरत के लिए किरात का सही तरीका

औरत को हाथों की हथेली को सीने पर रखना होता है, पहले उलटे हाथ की हथेली और फिर उसके ऊपर सीधे हाथ की हथेली यानि पांचों उँगलियाँ उलटे हाथ के ऊपर रख कर सना पड़नी चाहिए|  

औरत के लिए रुकु का सही तरीका

रुकु करना मर्द और औरत दोनों के लिए जरुरी है लेकिन औरतो के रुकु करने का तरीका थोड़ा अलग होता है| किरात के बाद रुकु मे जाना होता है औरत के रुकु मे जाने का तरीका यह है की सबसे पहले अपने हाथों की उंगलियों को घुटनों तक ले जाकर रखें, घुटना पकड़ना नहीं है केवल रखना है और ख्याल रखें की उंगलियां सीधी होनी चाहिए| औरत को रुकु में कमर और सुरीन को सीधा नहीं रखना होता है, औरत को कमर इतना झुकाए की औरत के हाथ घुटनों तक पहुँच जाए। 

सजदे का सही तरीका

रुकु के बाद सजदा करना होता है, औरत के सजदे मे जाने का सही तरीका यह है की औरत सबसे पहले घुटनों को जमीन पर रख लें, फिर दोनों हाथो रख कर सही तरीके से बैठ जाएं उसके बाद उलटे पेअर को नीचे रखें फिर उसके ऊपर सीधा पैर रख दें| एक बात का खास ख्याल रखें की आपका रुख क़िब्ले की तरफ होना चाहिए|

कया औरतों मर्दों की नमाज़ बिलकुल अलग है?

औरत और मर्द की नमाज में बहुत थोड़ा सा अंतर होता है, औरत और मर्द के वजू करने का तरीका थोड़ा सा अलग है| औरत का किरात करने का तरीका, सजदा करने का तरीका, रुकु करने का तरीका इत्यादि में थोड़ा अंतर होता है| जितनी नमाज़ें मर्दों पर फ़र्ज़ होती है उतनी ही नमाजे औरतों पर भी फ़र्ज़ होती है, जितनी रकात मर्दो के लिए बताई गई है उतनी ही औरतो के लिए भी बाते गई है| औरतो के लिए जुमा और ईद की नमाज़ अदा करना फ़र्ज़ नहीं है, मर्दो के लिए नमाज अदा करने की जगह मस्जिद और औरतो के लिए नमाज अदा करने के लिए सबसे अच्छी जगह उसका घर है|

औरतों की नमाज़ में अन्तर क्यों है?

दअरसल यह हम सभी जानते है की खुदा ने औरत और मर्द के जिस्म की बनावट अलग अलग होती है| इस्लाम धर्म में औरत के सारे बदन को पर्दा माना गया है केवल चेहरे को छोड़कर औरत शरीर के आने हिस्सों को बगैर ज़रूरत के किसी और चीज़ का खोलना सख्त मना किया है| शरीर की बनावट की वजह से औरत की नमाज अदा करने में अंतर रखा गया है और अगर कोई भी औरत उसे नहीं मानती है तो उसकी नमाज पूरी नहीं मानी जाती है

हम आशा करते है की आपको हमारे लेख नमाज पढ़ने का तरीका ( namaz ka tarika step by step ) या नमाज पढ़ने का सही तरीका में दी गई जानकारी फायदेमंद लगी होगी| अगर आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी पसंद आई है तो इस लेख को अधिक से अधिक लोगो के साथ शेयर करें जिससे किसी ऐसे शख्स की मदद हो सकें जिसे नमाज पढ़ने का तरीका ( namaz padhne ka tarika in hindi ) मालूम नहीं है|

नमाज़ पढ़ने के फायदे- Namaaz Parhne ke Fayde in Hindi

ऊपर आपने नमाज पढ़ने का सही तरीका जाना, अब हम आपको नमाज पढ़ने के फायदे के बारे में जानकारी दे रहे है, हालाँकि नमाज पढ़ने के फायदे बहुत सारे है उनमे से कुछ फायदे निम्न प्रकार है   

पांचो वक़्त की नमाज़ पढ़ने से रोजी में बरकत होती है

नमाज पढ़ने वाला शख्स अज़ाबे क़ब्र से महफूज़ रहता है।

नमाज पढ़ने से जन्नत में जगह मिलती है।

नमाज़ इंसान के मरने के बाद कब्र की अजब से हमारी हिफाज़त करती है ।

नमाज़ पढ़ने वाले शख्स के चेहरे पर नूर आता है|

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