Ramzan ka Chand Dekhne ki Dua

Ramzan ka Chand Dekhne ki Dua Hindi Mein

प्रत्येक मुसलमान के लिए रमजान का महीना सबसे ज्यादा अहमियत रखता है, रमजान के महीने का इन्तजार सभी को बहुत बेसब्री से रहता है क्योंकि इस महीने को खुदा की इबादत का महीना भी कहा जाता है| रमजान के महीने की शुरुआत चाँद देखकर होती है और रमजान का समापन भी चाँद देखकर ही होता है| लेकिन कया आप जानते है की रमजान का चाँद दिखने पर रमजान का चाँद देखने की दुआ (ramzan ka chand dekhne ki dua) भी पढ़ी जाती है, हालांकि अधिकतर मुसलमानो को चाँद दिखने की दुआ के बारे में पता होता है लेकिन आज भी कुछ मुसलमान ऐसे भी है जिन्हे रमजान में चाँद दिखने की दुआ के बारे में पता नहीं होता है|

ऐसे में इंसान मौलवियो से या इंटरनेट पर रमजान का चाँद देखने की दुआ इन हिंदी में सर्च करता है, अगर आपको भी चाँद देखने की दुआ के बारे में जानकारी नहीं है तो हमारा यह लेख आपके लिए फायदेमंद साबित होगा| रमजान के पाक महीने में सभी मुसलमान भाई और बहन ज्यादा से ज्यादा समय अल्लाह की इबादत में लगते है ऐसा कहा जाता है की इस महीने में मांगी दुआ बहुत जल्द कबूल होती है| इस्लाम धर्म के सभी त्योहार में चाँद देख कर ही मनाए जाते है|

Ramzaan ka chand dekhne ki Dua

यह तो आप जानते ही है की रमजान रमजान का चाँद दिखने पर अगले दिन से रोजे शुरू हो जाते है, इस्लाम में सभी त्योहार चाँद देख कर मनाए जाते है| रमजान का चाँद देखने की दुआ हिंदी में (ramzan ka chand dekhne ki dua hindi mein) के बारे में जानकारी देने से पहले हम आपको चाँद की अहमियत के बारे में जानकारी देते है

इस्लाम में चाँद की अहमियत 

यह तो हम सभी जानते ही है की इस्लाम धर्म में किसी भी पर्व जैसे ईदुल फितर, रमजान, ईदुज्जुहा और मुहर्रम जैसे प्रमुख पर्वों को मनाने से पहले चांद को देखे जाने का रिवाज होता है और चांद देखकर ही सभी पर्व मनाए जाते है। पूरे विश्व में सभी इस्लाम धर्म को मानने वाले इंसान अपने सभी पर्व हिजरी कैलेंडर के मुताबिक ही मनाते है, अब आप सोच रहे होंगे की आखिरी हिजरी कैलेंडर कया होता है? दरसअल हिजरी कैलेंडर चंद्र गणना पर आधारित होता है| आज से लगभग 622 ईस्वी पूर्व हिजरी कैलेंडर का निर्माण हुआ था, जब हजरत मुहम्मद साहब ने मक्का से मदीना की ओर रुख करा था तो इसे हिज्र कहा गया था और इसी समय इस कैलेंडर को बनाया था इसीलिए उस समय इसे हिजरी कैलेंडर के नाम से जाना गया था| मुहम्मद साहब ने इस्लाम धर्म के सभी पर्व चाँद को देख कर मनाने के लिए कहा था और सभी इस्लामी पर्वो को हिजरी कैलेंडर के अनुसार मनाने की हिदायत दी थी|

रमजान के चाँद को देख कर पढ़ने की दुआ (ramzan ke chand ko dekh kar padhne ki dua)

यह तो हम सभी जानते है की रमजान का महीना सबसे ज्यादा पाक होता है और इस महीने में सभी मुस्लिम भाई और बहन ज्यादा से ज्यादा समय खुदा की इबादत करने में बिताते है| सभी मुस्लिम भाई और बहन पूरे दिन रोजा रखते है और शाम को इफ्तारी के बाद ही पानी और खाना खाते है| रोजा रखना प्रत्येक मुसलमान के लिए जरुरी होता है लेकिन अगर कोई भाई या बहन शारीरिक रूप से बीमार है या वो रोजा रखने की स्थिति में नहीं है तो वो रोजा रखना छोड़ भी सकता है क्योंकि खुदा सब जानता है| रमजान की शुरुआत चाँद देख कर होती है, रमजान के चाँद का दीदार करने के लिए सभी बेसब्री से इन्तजार करते है, जब रमजान का चाँद दिखाई देता है तो उस समय सभी मुसलमानो को रमजान के चाँद को देख कर पढ़ने की दुआ – ramzaan ka chand dekhne ki dua जरूर पढ़नी चाहिए|

अल्लाहुम्मा अहिल्लहु बिल युमनि वल ईमानि वस सलामति वल इस्लामि वत्ताफ़ीकि लिमा तुहिब्बु व तरदा रब्बी व रब्बु कल्लाह

ऐ अल्लाह ! हम पर यह चाँद अम्न व ईमान और सलामती व इस्लाम के साथ गुज़ार ! और उस चीज़ की तौफीक के साथ जो तुझ को पसंद हो !  और जिस पर तू राजी हो ! मेरा रब और तेरा रब अल्लाह है ।

रमजान के चाँद देखने की दुआ पढ़ने का मतलब है की हम खुदा का शुक्रिया अदा कर रहे है जिसने रमजान का चाँद दिखाया है| चाँद दिखने के बाद अगले दिन से रोजा रखा जाता है, हालाँकि रोजा के बारे में सभी जानते है लेकिन अगर आपको रोजा के बारे में जानकारी नहीं है तो हम आपको रोजा के बारे में बताते है

रोजा कया होता है या रोजा का अर्थ कया है ?

रोजा रखना सभी मुसलमानो के लिए जरुरी होता है, रोजा का मतलब होता है रुकना। दरसल रुकने का मतलब है की आप अपने आपको बुराई या पाप करने से रुकना, असल जिंदगी में दिन में इंसान कई बार किसी की बुराई या पाप कर देता है लेकिन रमजान के पाक महीने में इंसान को किसिस भी तरह की बुराई या पाप करने से बचना चाहिए| इस महीने में सभी मुसलमानो को गरीबो की मदद करनी चाहिए और किसी भी प्रकार का गलत काम या हराम का पैसा नहीं लेना चाहिए| सभी मुसलमानो को सूर्योदय पूर्व से लेकर सूर्यास्त पश्चात तक पानी या किसी भी चीज का सेवन नहीं करना होता है|

रमजान के कितने दिन बाद ईद आती है?

रमजान के पाक महीने की शुरुआत और समापन चांद के दिखाई देने पर ही होता है| ईद मुसलमानो का प्रमुख त्योहार होता है जिसका इन्तजार बच्चो से लेकर बड़ो तक सभी को होता है| रमजान के महीने में रोजे 29 या 30 होते है रमजान के महीने में 29 या 30 दिनों के बाद ईद का चांद दिखाई देता है, ईद सबसे पहले सऊदी अरब में मनाई जाती है उससे अगले दिन भारत, पकिस्तान इत्यादि देशो में ईद का त्योहार मनाया जाता है। नबी करीम सल लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने रमज़ान के बारे में कहा है की चाँद देखकर रोजा रखो और चाँद देख कर इफतार करो अगर ईद का चाँद नज़र नहीं आए तो तीस दिन पूरे रोजे रखो।

सहरी और इफ्तारी सहर क्या है ?

रमजान के महीने में सहरी और इफ्तारी की अहमियत बहुत ज्यादा होती है, रोजे के दिन जब सूरज छिप जाएं उस वक़्त इफ्तारी करनी चाहिए और सुबह सूरज निकलने से पहले सहरी करनी चाहिए| इसीलिए सभी मुस्लिम लोगो इफ्तारी की याद दिलाने के लिए लगभग सभी जगहों पर गोला छोड़ा जाता है और सुबह सहरी के लिए अजान होती है|

रमजान का चाँद देखने के बाद क्या पढ़े (ramzan ka chand dekhne ke baad kya padhe )

ऊपर आपने पढ़ा की रमजान का चाँद देखने पर हमे कौन सी दुआ पढ़नी चाहिए, अब हम आपको रमजान का चाँद देखने के बाद कया पढ़ना चाहिए या रमजान का चाँद देखने के बाद कौन सी दुआ पढ़नी चाहिए इसके बारे में बताते है| असल में रमजान का चाँद देखने के बाद कोई अलग से दुआ नहीं पढ़ी जाती है, रमजान का चाँद देखने के बाद वही दुआ (ramzan ka chand dekhne ke baad kya padhe ) पढ़ी जाती है जो चाँद देखने की दुआ होती है| रमजान का चाँद देखते हुए जो पढ़ी जाती है उसी दुआ को पढ़कर आप दुआ मांगे|

ऊपर आपने रमजान का चाँद देखने की दुआ (ramzan ka chand dekhne ki dua) और रमजान के चाँद को देख कर पढ़ने की दुआ के बारे में जानकारी प्राप्त करने के साथ साथ कई आने महत्पूर्ण जानकारी भी पढ़ी| अंत में हम यह जरूर कहेंगे की रमजान के महीने में रोजे सभी को रखने चाहिए और हमारे इस पेज को अपने दोस्तों के साथ साँझा जरूर करें जिससे उन्हें भी अधिक जानकारी प्राप्त हो सके|

होम पेज यहाँ क्लिक करें

Also Read: 

Leave a Comment