Qurbani ki Dua in Hindi, English

Qurbani ki Niyat in Hindi, English

अगर आप कुर्बानी की नियत और दुआ (qurbani ki dua in hindi) के बारे में सर्च कर रहे है तो हमारा यह पेज आपके लिए काफी फायदेमंद साबित होगा, आज हम अपने इस पेज में कुर्बानी के बारे में अधिक से अधिक जानकारी उपलब्ध कराने की कोशिश करेंगे, इसीलिए हमारा यह लेख अंत तक जरूर पढ़ें| इस्लाम में कुर्बानी हर एक ऐसे मर्द और औरत के लिए वाजिफ बताई है जिस पर जकात फर्ज है, चलिए अब हम आपको सबसे पहले क़ुर्बानी की नियत के बारे में जानकारी दे रहे है

क़ुर्बानी की नियत | Qurbani ki niyat in Hindi

यह तो हम सभी जानते ही है की इस्लाम में किसी भी को करने से पहले उसकी नियत (qurbani ki niyat in hindi) करना जरुरी है| इस्लाम में अगर आप कुर्बानी करने से पहले कुर्बानी की नियत नहीं करते है तो आपकी कुर्बानी कुबूल नहीं होती है, इस्लाम में कुर्बानी को एक वाजिब इबादत माना गया है और कुर्बानी देने से काफी ज्यादा सवाब मिलता है| जब कोई भी मुस्लिम कुर्बानी के जानवर ज़िब्ह करने के लिए जाता है तो कुर्बानी करने के दौरान सबसे पहले कुर्बानी की दुआ को पढ़ा जाता है| जब कुर्बानी की दुआ समाप्त होने वाली होती है तब अल्लाह हू अकबर पर तब छुरी से तेजी से जानवर ज़िब्ह करके कुर्बानी को मुकम्मल करते हैं|

Qurbani ki Dua

कुर्बानी की नियत कब की जाती है 

काफी लोगो को यह पता है की कुर्बानी की नियत (qurbani ki niyat hindi mein) केवल कुर्बानी से पहले की जाती है लेकिन सच यह है कुर्बानी की नियत कुर्बानी देते वक्त और कुर्बानी का बकरा खरीदते समय भी की जाती है| अगर कोई मुस्लिम भाई कुर्बानी देने से पहले कुर्बानी की नियत नहीं करता है तो खुदा उसकी कुर्बानी को कबूल नहीं करता है| चलिए अब हम आपको कुर्बानी की नियत इन हिंदी के बारे में बताते है|

यह तो आप समझ ही गए होंगे की कुर्बानी की नियत करना कितना जरुरी है, हालाँकि हम आपको बता दें की कुर्बानी की नियत आपको किसी हदीस या इस्लामी किताब में लिखी हुई नहीं मिलती है| हदीसों में लिखा है कुर्बानी की नियत (Qurbani ki Dua in Hindi) दिल से की जाती है, कोई भी खुदा का बंदा अपने खुदा के लिए और उसकी रज़ा के लिए जानवर कुर्बान या कुर्बानी देता है तो इस कुर्बानी से अल्लाह काफी खुश होता है| क़ुर्बानी की नियत नीचे दे रहे है

“या अल्लाह मैं नेक इरादे और तेरी रज़ा और के खातिर यह कुर्बानी दे रहा हूं इसे कबूल फरमा.”

कुर्बानी की दुआ हिंदी में | Qurbani ki Dua in Hindi 

ऊपर आपने क़ुर्बानी की नियत के बारे में जाना, चलिए अब हम आपको क़ुर्बानी की दुआ के बारे बताते है, जो भी मुस्लिम भाई या बहन कुर्बानी दे रहा है उसे इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए की कुर्बानी की दुआ (qurbani ki dua in hindi) पढ़ते समय दुआ के आखरी लफ्ज अल्लाह हू अकबर पर तेजी से जानवर की गर्दन पर छुरी चलानी है और कुर्बानी दी जाती है| जब कुर्बानी पूरी हो जाएं या जानवर ज़िब्ह हो जाएं तो कुर्बानी के बाद की दुआ जरूर पढ़ें

“इन्नी वज्जहतु वजहि य लिल्लज़ी फ़ त रस्मावाति वल अर्दा हनीफँव व् माअन मिनल मुशरिकीन इन न सलाती व नुसुकी मह्या य व ममाती लिल्लाहि रब्बिल आलमीन

ला शरी क लहू व बि ज़ालि क उमिरतु व अन मिनल मुस्लिमीन अल्लाहुम्मा लक व मिन क बिस्मिल्लाहि अल्लाहु अकबर।“

कुर्बानी के बाद की दुआ हिंदी में | Qurbani ke baad ki Dua in hindi 

ऊपर आपने कुर्बानी की दुआ (qurbani ki dua in hindi) के बारे में जाना अब हम आपको कुर्बानी के बाद की दुआ के बारे में बताते है| यह तो आप जानते ही होंगे की कुर्बानी खुद के लिए दी जाती है या किसी अन्य शकस के लिए, कुर्बानी के बाद की दुआ दोनों के लिए लगभग एक जैसी होती है बस अगर आप किसी दूसरे के लिए कुर्बानी के बाद की दुआ पढ़ रहे है तो उसमे उस शख्स का नाम आ जाता है| चलिए सबसे पहले हम आपको कुर्बानी के बाद की दुआ के बारे में बताते है

“अल्लाहुम्म तक़ब्बल मिन्नी (मिन फलां) कमा तक़ब्बल्त मिन् ख़लीलिक इब्राहीम अ़लैहिस्सलाम व हबीबिक मुहम्मदिन सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम।“

ऊपर बताई गई दुआ कुर्बानी के बाद पढ़ी जाती है, अगर आप खुद के लिए कुर्बानी कर रहे है तो आपको ऊपर बताई गई दुआ को पढ़ना है, लेकिन अगर आप किसी अन्य शख्स के लिए कुर्बानी कर रहे है तो आपको ऊपर बताई गई दुआ में केवल मिन फलां की जगह पर उस शख्स का नाम लेना है जिसके नाम या जिसके लिए कुर्बानी कर रहे है|

बकरा जिबह करने की दुआ इन हिंदी | Bakra Zibah Karne ki Dua Hindi Mein

जब भी कोई भी मुस्लिम भाई बकरे की कुर्बानी देता है तो उसे बकरा जिबह करने की दुआ जरूर पड़नी चाहिए| हालाँकि क़ुरआने पाक या हदीस में बकरा जिबह करने की दुआ या जानवर जिबह करने की दुआ नहीं बताई है लेकिन कुराने पाक और हदीस से यह जरूर साबित होता है की बकरे की कुर्बानी देते समय आपको बिस्मिल्लाही अल्लोहू अकबर जरूर कहना है| बिस्मिल्लाही अल्लोहू अकबर कहने के बाद आप कोई भी जानवर को सुन्नत तरीके से हलाल कर सकते है| बकरा जिबह करने से पहले आपको बकरा जिबह की नियत करना बहुत जरुरी है, नीचे हम आपको जो नियत बता रहे है वो नियत सभी जानवर जिबह करने से पहले की जाती है| चलिए अब हम आपको जानवर जिबह करने की नियत के बारे में बताते है

जानवर जिबह करने की नियत | Janwar Zibah Karne ki Niyat

अगर आप बिना जानवर जिबह करने की नियत के जानवर जिबह कर देते है तो आपको उसका सवाब नहीं मिलता है| इसीलिए जावर जिबह करने से पहले नीचे बताई जा रही नियत को जरूर कर लें

 “नवैतु अन अज्बह हाजल हैवानी बिहैसू युखरिजू अन्हुद्द्मुल, मस्फुहू वतकुनु लह्मुहू हलालन्न| हिजमीइल्मुअमिनिन वल्मुअमिनाती मिस्मिल्लाही | अल्लोहू अकबर|”   

बकरा जिबह करने का तरीका या जानवर जिबह करने का तरीका

हालाँकि लगभग सभी को जानवर जिबह करने का तरीका मालुम होता है, लेकिन अगर आपको जानवर जिबह करने का तरिएक नहीं पता है तो हम आपको नीचे बकरा जिबह करने का तरीका या जानवर जिबह करने का तरीका बता रहे है

जो भी इंसान जानवर जिबा कर रहा है वो इंसान मुस्लिम होना बहुत ज्यादा जरुरी है, अगर आप किसी अन्य धर्म के इंसान से जिबह कराते है तो वो कबूल नहीं होती है|

यह जरुरी नहीं है की जिबह करने वाला कोई मर्द ही हो, जानवर जिबह कोई भी औरत या मर्द कर सकता है, लेकिन जिबह करने वाला मर्द या या औरत समजदार होना चाहिए|

जानवर जिबा करने से पहले आपको जानवर जिबह करने की दुआ बिस्मिल्लाही अल्लोहू अकबर पड़नी है और दुआ के आखिरी शब्द पर जानवर जिबह कर देना है|

जानवर जिबह करते समय ख्याल रखें की कजनवर जुबाह करने की दुआ आपको जुबान से जिबह करने की दुआ बिस्मिल्लाही अल्लोहू अकबर पढना है, इस दुआ को आपको दिल या मन में नहीं पड़ना है|

जिबह करने वाला इंसान अगर अकेला है तो वो जानवर को पकड़ कर जिबह कर सकता है और आपके पास अन्य शख्स मौजूद है तो वो भी जानवर को पकड़ सकते है|

जानवर को जिबह करते समय आपको एक बात का खास ख्याल रखना होता है की जानवर जिबह के वक्त जानवर का सिर धड से बिलकुल या पूरी तरह से अलग नहीं होना चाहिए|

जावर का जिबह करते वक्त अगर गलती या धोके से जानवर का सिर धड़ से अलग हो जाएं तो कोई परेशानी नहीं है| लेकिन अगर जिबह करने वाले शख्स ने जानबूझ कर जानवर का सिर को धड़ से अलग किया है तो ऐसे में उस शख्स को मकरू माना जाता हे पर जिस जानवर की कुर्बानी दी गई है उसका गोस्त सभी खा सकते है|

कुर्बानी की दुआ इंग्लिश में | Qurbani ki Dua in English

ऊपर आपने कुर्बानी की नियत और दुआ के बारे में जाना, अब हम आपको कुर्बानी की दुआ इन इंग्लिश की जानकारी दे रहे है

Inni waz jahtu wajahi ya lilladzi fa ta ra samawati wal arz hanifauv wa ma ana minal mushrikeen na in na salati wa nusuki wa mahya ya wa mamaati lillahi rabbil alamin. La shariq lahu wa bizali ka uriratu wa ana minal muslimin. Allahumma ma la ka wa min ka bismillahi Allahu Akbar.

कुर्बानी की दुआ पीडीएफ में | Qurbani ki Dua in PDF 

आज के समय में काफी सारे मुस्लिम भाई और बहन इस्लाम से सम्बंधित जानकारी को अपने मोबाइल में सेव करके रख लेते है, जिससे उन्हें जब जरुरत हो तो वो उसे तुरंत मोबाइल में खोलकर देख लें| इसीलिए कुछ लोग क़ुरानी की दुआ पीडीएफ में सर्च करते है, हालांकि काफी सारी साईट क़ुर्बानी की दुआ की पीडीएफ उपलब्ध कराती है|

ऊपर आपने कुर्बानी की दुआ और नियत के बारे में जाना, अब हम आपको कुर्बानी के बारे में जानकारी उपलब्ध करा रहे है, नीचे बताई जा रही बातो को सभी मुस्लिम भाई और बहन को मालुम होनी चाहिए|

इस्लाम में कुर्बानी देने के लिए क्यों कहा है? या मुसलमान जानवरों की क़ुरबानी क्यों देते हैं

कुरान शरीफ में बताया गया है कि कुर्बानी अल्लाह के नबी हज़रत इब्राहिम की सुन्नत मानी गई है। एक बार हजरत इब्राहिम ने सपने में देखा कि वो अपने इकलौते बेटे इस्माइल की कुर्बानी दे रहे है, ऐसा सपना देख हजरत इब्राहिम थोड़े परेशान हो गए| फिर उन्होंने अपने सपने के बारे में अपने बेटे इस्माइल को बताया, अब्बा के सपने की बात सुनकर इस्माइल बहुत ज्यादा खुश हो गया और खुशी खुशी अल्लाह की राह में क़ुर्बान होने के लिए तैयार हो गया। फिर हजरत इब्राहीम अपने बेटे के साथ अल्लाह की राह में कुर्बानी करने के लिए चल पड़ें, सबसे पहले हजरत इब्राहिम ने अपने बेटे का मुंह क़िबला की तरफ करके लेटा दिया| उसके बाद हजरत इब्राहिम ने अपने बेटे की गर्दन पर छुरी फेरी, छुरी फेरते ही अल्लाह ताला ने आसमान से एक दुंबा भेजते हुए कहा कि ऐ इब्राहिम अपने बेटे को ज़िब्ह करो। हम तुम्हारा इम्तिहान लेना चाहते थे”। उसके बाद हजरत इब्राहिम ने अल्लाह ताला की बात पर अमल किया, उसके बाद अल्लाह को हज़रत इब्राहिम इस्माइल का यह यह ज़ज़्बा बहुत ज्यादा पसंद आया  और तभी से अल्लाह ने क़यामत तक मुसलमानों के लिए कुर्बानी को सुन्नत कर दिया था। उसी दिन से हज़रत इब्राहिम के सुन्नत को जिंदा करने के लिए पूरी कायनात के मुसलमान अल्लाह की राह में जानवरों की कुर्बानी दे रहे है|

कुर्बानी कब दी जाती है

यह तो आप अच्छी तरह से समझ ही गए होंगे की कुर्बानी सभी मुस्लिमो के लिए वाजिफ है, कुर्बानी की शुरुआत मदीना से हुई थी और जानवरो की कुर्बानी पर इस्लामिक कानून भी बना हुआ है, उस कानून को पूरी दुनिया के मुसलमान मानते है| अगर आपको यह नहीं पता है की कुर्बानी कब होती है या कुर्बानी कब दी जाती है तो हम आपको बता दें की इस्लाम के सभी काम हिजरी कैलेंडर के हिसाब से किए जाते है| हिजरी कैलेंडर के मुताबिक 12वें महीने धू-अल-हिज्जा की 10 से 12 तारीख को जानवरों की कुर्बानी होती है, कुर्बानी के लिए 3 दिनों का वक़्त होता है। कुर्बानी के लिए तब तीन दिन में आप बकरा ईद की नमाज़ के बाद कभी भी जानवर की कुर्बानी दे सकते है|

जिस भी गांव या या शहर में बक़रीद की नमाज़ पढ़ी जाती है वहां पर बकरा ईद की नमाज के बाद ही कुर्बानी दी जाती है, नमाज से पहले कुर्बानी देना जायज नहीं मानी जाती है, लेकिन जिस जगह पर बकरा ईद की नमाज नहीं पढ़ी जाती है उस जगह पर आप सुबह से ही कुर्बानी दे सकते है|

कुर्बानी किस के लिए वाज़िब होती है

कुछ लोगो का मानना है की कुर्बानी केवल मर्द ही देता है, लेकिन यह सही नहीं है दरसल कुर्बानी मर्द और औरत दोनों में से कोई भी कर सकता है| अल्लाह ने कुर्बानी ऐसे मुस्लिम मर्द और औरतों के लिए वाज़िब बताया है जिन पर ज़कात फर्ज़ होती है, जो मुस्लिम मालदार होते है वो अपने पैगंबरों,  माँ-बाप,  दादा-दादी और बच्चों के नाम पर कुर्बानी दे सकते है।

कैसे जानवर की कुर्बानी दी जाती है या कुर्बानी का जानवर कैसा होना चाहिए 

काफी मुस्लिम भाई और बहन के मन में यह सवाल रहता है की कुर्बानी के लिए जानवर कैसे चुने या कुर्बानी का जानवर कैसा होना चाहिए? तो हम आपको बता दें की अगर आप दुंबा,  बकरा और भेड़ जैसे छोटे जानवरों की कुर्बानी दे रहे है तो इन छोटे जानवरो की कुर्बानी केवल एक आदमी के नाम पर दी जा सकती है और अगर आप बड़ा जानवर जैसे बैल,  भैंस और ऊंट जैसे बड़े जानवरों में सात लोगों के नाम पर कुर्बानी दी जा सकती है। चाहे आप छोटे जानवर की कुर्बानी दें या बड़े जानवर की कुर्बानी दें लेकिन एक बात का ख़ास ख्याल रखें की जिस भी जानवर की कुर्बानी दी जा रही है वो तंदुरुस्त और बालिक होना चाहिए|

अगर किसी जानवर का सींग जड़ से उखड़ गया है या पहले से उखड़ा हुआ है तो ऐसे जानवर की कुर्बानी नहीं दी जाती है| अगर कोई जानवर आंख या पैर से अपाहिज है तो तो भी उस जानवर की कुर्बानी नहीं देते है|

अगर आपने कुर्बानी का जानवर खरीद लिया है और खरीदने के बाद जानवर में कोई बड़ा ऐब निकल आता है तो गरीब आदमी उस जानवर की कुर्बानी दे सकता है लेकिन अगर आप मालदार है तो आपको उस जानवर की कुर्बानी नहीं देनी चाहिए|

कुर्बानी के लिए खरीदा गया जानवर अगर खो जाए या मर जाए तो ऐसे में गरीब आदमी को दूसरा जानवर खरीदने की जरुरत नहीं क्योंकि उसके लिए उसके द्वारा खरीदे हुए जानवर को कुर्बानी नाना जाता है लेकिन मालदार इंसानो को नया जानवर खरीदने की हिदायत दी गई है|

अगर कुर्बानी का जानवर गुम गया है और अगर आपका खोया हुआ जानवर कुर्बानी के आखरी दिन भी मिल जाता है तो उस जानवर की कुर्बानी वाजिफ है।

इस्लाम में जानवरों की कुर्बानी करने के फायदे

यह तो आप समझ ही गए होंगे की कुर्बानी हज़रत इब्राहिम की सुन्नत मानी जाती है, लेकिन कुछ मुस्लिम भाई बहन के मन में यह सवाल होता है की कुर्बानी जानवर की ही क्यों दी जाती है या जानवर की कुर्बानी के फायदे कया है? तो हम आपको बता दें की कुर्बानी के जानवर के हर एक बाल के बदले में एक नेकी मिलती है और जानवर की कुर्बानी करने से सवाब मिलता है।

जानवरों की कुर्बानी देने का सुन्नत तरीका 

आप जिस भी जानवर की कुर्बानी दे रहे है या जिस जानवर को आप कुर्बानी के लिए खरीद कर लाए है उस जानवर को कुर्बान करने से पहले खूब अच्छी तरह से खिलाना और पिलाना चाहिए| जानवर की कुर्बानी से पहले उसे पानी जरूर पिलाएं|

कुर्बानी के बाद गोश्त का तक्सीम

यह तो आप सभी जान ही गए होंगे की बड़े जानवरों में सात लोगो के नाम की कुर्बानी होती है इसीलिए कुर्बानी के बाद जानवर के गोश्त के सात हिस्से किए जाते है| इसीलिए गोश्त का बंटवारा तराजू से करें, तराजू से आप सबको बराबर हिस्सा दे सकते है, अपने हिस्से का गोश्त लेने के बाद आपको अपने हिस्से को तराजू की मदद से तीन बराबर भागों में बाँट लें, जिसमे गोश्त का पहला हिस्सा आपके घर वालों का, दूसरा हिस्सा आपके दोस्तों का और तीसरा हिस्सा गरीबों का होता है। एक बात का खास ख्याल रखें की कुर्बानी का गोश्त बेचना हराम माना गया है|

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