Isha ki Namaz ka Tarika in Hindi Step by Step

इस्लाम धर्म में नमाज अदा करना फर्ज बताया गया है और सभी मुस्लिम भाई और बहन को नमाज अदा जरूर करनी चाहिए| यह तो हम सभी जानते है की इस्लाम में पांच वक़्त की नमाज अदा करनी चाहिए, दिन की सबसे आखिरी नमाज ईशा की नमाज होती है| ईशा की नमाज दिन की अन्य नमाजो से लम्बी होती है, ईशा की नमाज के लंबे होने का कारण ज्यादा रकाते होना होता है| हालांकि ईशा की नमाज जितनी लंबी होती है उतना ही ज्यादा उसका सवाब भी मिलता है, काफी सारे मुस्लिम भाई ऐसे भी है जिन्हे ईशा की नमाज पड़ने का सही तरीका मालूम ना होने की वजह से वो नमाज तो रोज पढ़ते है लेकिन उनकी नमाज कुबूल नहीं होती है| इसीलिए ईशा की नमाज पड़ने का सही तरीका मालुम होना बहुत ज्यादा जरुरी है, अगर आपको ईशा की नमाज के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है तो हमारा यह लेख आपके लिए फायदेमंद साबित होगा क्योंकि आज हम अपने इस लेख में Isha ki namaz ka tarika in Hindi step by step बताने जा रहे है| चलिए सबसे पहले हम आपको ईशा की नमाज के वक्त के बारे में बताते है

ईशा की नमाज का वक्त कब से शुरू होता है  

अगर आपको आपको यह नहीं पता है की ईशा की नमाज का वक्त कब से शुरू होता है तो हम आपको बता दें की ईशा की नमाज का वक्त उस समय से शुरू होता है जब सूरज पूरी तरह से डूब जाता है मतलब जब रात हो जाती है| ईशा की नमाज का समय गर्मियों और सर्दियों के मौसम में थोड़ा सा अलग होता है, अगर आप सर्दियों के मौसम में ईशा की नमाज पढ़ रहे है तो सर्दियों में ईशा की नमाज का वक्त रात में 7:15 से 7:30 के आस पास होता है और अगर आप गर्मियों के मौसम में ईशा की नमाज पढ़ रहे है तो गर्मी में ईशा की नमाज का वक्त 8:30 बजे के आसपास होता है| यह हमने आपको ईशा की नमाज शुरू होने का वक्त बताया है काफी लोगो के मन में यह सवाल भी होता है की ईशा की नमाज का वक्त कब खत्म होता है या ईशा की नमाज का वक्त कब तक रहता है| चलिए अब हम आपको ईशा की नमाज किस समय तक पढ़ी जा सकती है इसके बारे में जानकारी देते है

ईशा की नमाज का वक्त कब तक होता है 

काफी सारे मुस्लिम भाई और बहन ऐसे होते है जिन्हे यह नहीं पता होता है की ईशा की नमाज पड़ने का वक्त कब तक रहता है तो हम आपको बता दें की ईशा की नमाज अदा करने का वक्त मगरिब की नमाज अदा करने के बाद से लेकर तहज्जुद की नमाज पढ़ने से पहले तक का होता है| आप ऐसे भी समझ सकते है की मगरिब की नमाज के बाद और तहज्जुद की नमाज से पहले आप ईशा की नमाज अदा कर सकते है, अगर आप इस वक्त में नमाज अदा करते है तो आपकी नमाज कज़ा होगी और अगर  आप इसक समय के बाद या पहले ईशा की नमाज अदा करते है तो आपकी नमाज कुबूल नहीं होगी।

ईशा की नमाज में कितने रकात है | Isha Ki Namaz Ki Rakat

ईशा की नमाज में कुल रकात 17 होती है,  जिसमे 4 रकात सुन्नत की, 4 रकात फर्ज की, 2 रकात सुन्नत की, 2 रकात नाफिल की, 3 रकात वितर वाजिब की और फिर 2 रकात नाफिल की होती है| ईशा की नाम सबसे लंबी नमाज होने की वजह से कुछ मुस्लिम भाई और बहन इस नमाज को पूरी नहीं पढ़ते है| यह तो हम सभी जानते है की किसी भी नमाज को पढ़ने से पहले उसकी नियत करना बहुत ज्यादा जरुरी है, चलिए अब हम आपको ईशा की नमाज की नियत के बारे में जानकारी दे रहे है|

ईशा की नमाज कि नियत कैसे करें | Isha Ki Namaz Ki Niyat Kaise Karen

ईशा की नमाज का तरीका (Isha Ki Namaz Ka Tarika) जानने से पहले आपको ईशा की नमाज की नियत के बारे में जानना जरुरी है| जैसे हर नमाज की नियत होती है उसी तरह ईशा की नमाज की नियत होती है, अगर आप नमाज पढ़ने से पहले नियत नहीं करते है तो आपकी नमाज कबूल नहीं होती है| कुछ भाइयो को लगता है की नियत तेज बोलकर की जाती है, जबकि यह सही नहीं है, खुदा केवल आपका दिल और नियत देखता है, किसी भी नमाज की नियत आपको मन में बोल कर करनी चाहिए| अगर आपको ईशा की नमाज की नियत के बारे में जानकारी नहीं है तो चलिए अब हम आपको ईशा की नमाज की नियत के बारे में जानकारी देते है

ईशा की नमाज की 4 रकात सुन्नत की नियत 

सबसे पहले हम आपको ईशा की 4 रकात सुन्नत नमाज की नियत के बारे में बता रहे है, चार रकात की सुन्नत नमाज की नियत नीचे दी जा रही है

“नियत करता हूं मैं 4 रकात नमाज ईशा की सुन्नत वास्ते अल्लाह ताआला के मुंह मेरा तरफ काबा शरीफ के अल्लाहू अकबर।”

ईशा की नमाज की 4 रकात फर्ज की नियत 

अगर आप ईशा की 4 रकात फर्ज नमाज की नियत करना चाहते है तो हम आपको बता दें की फर्ज की नमाज की नियत दो तरह की होती है| अगर आप ईशा की नमाज घर पर अदा कर रहे है तो ईशा की चार रकात फर्ज नमाज की नियत अलग होती है और अगर आप ईशा की नमाज मस्जिद में अदा कर रहे है तो ईशा की चार रकात की नियत अलग होती है| सबसे पहले हम आपको घर पर ईशा की नमाज की चार रकात फर्ज की नियत बता रहे है

“नियत करता हूं मैं 4 रकात नमाज ईशा की फर्ज वास्ते अल्लाह ताआला के मुह मेरा तरफ़ क़ाबा शरीफ के अल्लाहु अकबर।”

अगर आप ईशा की नमाज मस्जिद में नमाज अदा करते है तो आपको इसके लिए नीचे बताई जा रही नियत कर लें| नीचे बताई जा रही नियत को मस्जिद में नमाज पढ़ते वक्त पढ़ना है

“ नियत करता हूं मैं 4 रकात नमाज ईशा की पर वास्ते अल्लाह ताआला के पीछे इस इमाम के मुंह मेरा तरफ काबा शरीफ के अल्लाहू अकबर।”

ईशा की नमाज की 2 रकात सुन्नत की नियत 

ईशा की दो रकात सुन्नत नमाज की नियत करना चाहते है नीचे दी गई नियत को कर लें

“नियत करता हूं मैं 2 रकात नमाज ईशा की सुन्नत वास्ते अल्लाह ताआला के मुंह में तरफ काबा शरीफ के अल्लाहू अकबर।”

ईशा की नमाज की 2 रकात नफील की नियत 

यह तो हम सभी जानते है की नफील की नमाज से सबसे ज्यादा सवाब मिलता है, चलिए अब हम आपको ईशा की दो रकात नफील नमाज की नियत नीचे बता रहे है

“ नियत करता हूं मैं 2 रकात नमाज ईशा की नफिल वास्ते अल्लाह ताआला के मुंह मेरा तरफ काबा शरीफ के अल्लाहू अकबर।”

ईशा की 3 रकात वीतिर की नमाज़ की नियत 

अगर आपको ईशा की तीन रकात वीतिर नमाज की नियत के बारे मालुम नहीं है तो नीचे हम आपको तीन रकात वीतिर की नियत बता रहे है

” नियत करता हूं मैं 3 रकात नमाज़ ईशा की वितिर वाजिब वास्ते अल्लाह ताला के मुँह मेरा तरफ काबा शरीफ के अल्लाहु अकबर।”

ईशा की नमाज की 2 रकात नफिल की नियत 

नीचे हम आपको ईशा की दो रकात नफील नमाज की नियत के बारे में बताते है, नीचे दी गई नियत को करने के बाद आप ईशा की नमाज अदा कर सकते है

“नियत करता हूं मैं 2 रकात नमाज ईशा की नफिल वास्ते अल्लाह ताआला के मुंह मेरा तरफ काबा शरीफ के अल्लाहू अकबर।”

ईशा की नमाज पढ़ने का सही तरीका (isha ki namaz ka tarika step by step)

यह तो आप ऊपर पढ़ ही चुके है की ईशा की नमाज सबसे लंबी नमाज होती है और इसमें 17 रकात होती है, चलिए अब हम आपको ईशा की नमाज की रकाते पढ़ने का तरीका बता रहे है

ईशा की 4 रकात सुन्नत नमाज इस तरह पढ़ेंगे | Isha Ki Namaz Ka Tarika

ईशा की नमाज में चार रकात सुन्नत की होती है, सबसे पहले इन्ही चारो रकातो को पढ़ा जाता है, सुन्नत की चार रकात पढ़ने से पहले उनकी नियत करना बेहद जरुरी है तो सुन्नत की नियत के बारे में हमने आपको ऊपर बता दिया है, आप सुन्नत की नियत ऊपर से पढ़ लें उसके बाद रकात पढ़ें, चलिए जानते है ईशा की नमाज की चार रकात सुन्नत को पढ़ने का तरीका

पहली रकात सुन्नत को कैसे पढ़ें 

ईशा की नमाज की चार रकात की सबसे पहली रकात में सबसे पहले आप सना – सना सुब्हानका अल्लहुमा वबी हमदिका पढ़ें|

उसके बाद दूसरा ताउज – आउज़ बिल्लाहे मिन्नस सैतानिर्रजिम पढ़ लें|

फिर सूरह फातिहा यानि अल्हम्दु लिल्लाह को पढ़ लें|

उसके बाद आप कुराने शरीफ की कोई एक सूरह को पढ़ लें|

कुराने शरीफ की सूरह पढ़ने के बाद अल्लाहु अकबर बोलते हुए रुकू में चलें जाएँ रुकू में जाने के बाद आपको कम से कम 3 मर्तबा सुब्हान रब्बिल अजीम बोलना है|

उसके बाद आपको समी अल्लाह हुलेमन हमीदा बोलते हुए खड़े हो जाएँ, खड़े होने के बाद एक बार रब्बना लकल हम्द बोलें|

फिर उसके बाद आपको अल्लाहु अकबर बोलते हुए सजदे के लिए जाना है, सजदा करते समय आपको कम से कम 3 बार आपको सुब्हान रब्बि यल आला बोलना है, सजदा करने के बाद आपको अल्लाहु अकबर बोलते हुए दूसरी रकात के लिए खड़े हो जाना है|

दूसरी रकात सुन्नत पढ़ने का तरीका 

दूसरी रकात सुन्नत में आपको सना नहीं पढ़नी है, इसमें सबसे पहले आपको बिस्मिल्लाह हिर्रहमा निर्रहीम पढ़नी है उसके बाद आपको सूरह फातिहा यानि अल्हम्दु लिल्लाह पढ़ना है है उसके बाद आपको जो भी क़ुरान शरीफ की सूरह याद हो उसे पढ़ लेना है|

फिर आपको रुकू के लिए जाना है और रुकू के दौरान आपको कम से कम 3 बार सुब्हान रब्बिल अजीम जरूर कहना है|

रुकू करने के बाद आपको समी अल्लाह हुलेमन हमीदा बोलते हुए सही से खड़े हो जाएं, खड़े हो जाने के बाद एक मर्तबा रब्बना लकल हम्द भी बोलें|

सीधे खड़े होने की बाद आपको अल्लाहु अकबर बोलते हुए सजदे के लिए जाना है, सजदा करते समय आपको कम से कम 3 बार सुब्हान रब्बि यल आला बोलना है, सजदा करने के बाद आपको अल्लाहु अकबर बोलते हुए पंजो पर ऐसे बैठ जाएँ जैसे आप नमाज पढ़ते समय बैठते है |

जब आप सही से बैठ जाएँ फिर आपको अपनी शहादत की ऊँगली ऊपर उठाकर अत्तहियातु लिल्लाहि पढ़ना है उसके बाद आपको अल्लाहु अकबर बोलते हुए आप तीसरी रकात पढ़ने के लिए खड़े हो जाएँ |

तीसरी रकात सुन्नत पढ़ने का तरीका 

ईशा की नमाज की सुन्नत की तीसरी रकात पढ़ने के लिए सबसे पहले आपको तस्मियाँ यानि बिस्मिल्लाहहिर्रहमा निर्रहीम पढ़ना है, फिर आपको सूरह फातिहा मतलब अल्हम्दुलिल्लाह पढ़ना है, उसके बाद आपको कुरान शरीफ का कोई एक सूरह पढ़ना है|

सूरह पढ़ने के बाद आपको अल्लाहु अकबर बोलते हुए रुकू में जाना है, रुकू में जाने के बाद आपको कम से कम 3 मर्तबा सुब्हान रब्बिल अजीम बोलना है|

रुकू करने के बाद आपको अल्लाह हुलेमन हमीदा बोलते हुए खड़े हो जाना है, खड़े होने के बाद एक बार रब्बना लकल हम्द भी पढ़ लें|

इसके बाद आप अल्लाहु अकबर बोलते हुए सजदे में जाएँ, सजदा करते समय आपको कम से कम तीन बार सुब्हान रब्बि यल आला बोलें, उसके बाद अल्लाहु अकबर बोलते हुए चौथी रकात के लिए खड़े हो जाना है|

चौथी रकात सुन्नत पढ़ने का तरीका 

ईशा की नमाज की चौथ रकात सुन्नत में आपको सबसे पहले बिस्मिल्लाह हिर्रहमा निर्रहीम बोलना है उसके बाद आपको सूरह फातिहा यानि अल्हम्दुलिल्लाह बोलना है, फिर आपको क़ुरान शरीफ की कोई भी एक सूरह बोलनी है|

कुरान शरीफ की सूरह बोलने के बाद आपकोअल्लाहु अकबर बोलते हुए रुकू में जाना है और रुकू में जाने के बाद आपको कम से कम तीन बार सुब्हान रब्बिल अजीम बोलना है|

उसके बाद आपको समी अल्लाह हुलेमन हमीदा बोलते हुए खड़े हो जाना है, फिर एक बार रब्बना लकल हम्द भी बोलें|

उसके बाद आपको अल्लाहु अकबर बोलते हुए सजदे में जाना है और सजदे के दौरान आपको कम से कम 3 बार सुब्हान रब्बि यल आला बोलना है|

चौथी रकात के सजदे मुकम्मल करने के बाद आपको अपने पैरों के पंजो को मोड़ कर ऐसे बैठना है जैसे हम नमाज पढ़ते समय बैठते है| उसके बाद आपको सबसे पहले अपनी शहादत की ऊँगली उठाते हुए एक बार अत्तहियातु लिल्लाहि बोलना है|

फिर एक बार मर्तबा दरूद शरीफ बोलना है उसके बाद आपको 1 बार दुआ ए मासुरा बोलना है|

उसके बाद आपको सलाम फेरना है, सबसे पहले अस्सलामो अलैकुम वरहमतुल्लाह बोलते हुए दाएं तरफ मुंह फेरे उसके बाद अस्सलामो अलैकुम वरहमतुल्लाह बोलते हुए बाएं तरफ मुंह फेर लें|

ईशा की 4 रकात फर्ज की नमाज पढ़ने का तरीका 

अगर ईशा की 4 रकात फर्ज नमाज़ पढ़ना चाहते है तो हम आपको बता दें की ईशा की चार रकात फर्ज की नमाज पढ़ने का तरीका लगभग वैसा ही होता है जैसे ईशा की 4 रकात सुन्नत नमाज़ का होता है| यह तो आपको पता ही है की किसी भी नमाज को पड़ने से पहले उसकी नियत की जाती है तो ईशा की चार रकात फर्ज की नमाज की नियत के बारे में हमने आपको ऊपर बता दिया है, अब हम आपको ईशा की चार रकात फर्ज की नमाज पढ़ने का तरीका के बारे में बता रहे है

ईशा की 4 रकात फर्ज की नमाज की पहली रकात पढ़ने का तरीका  (isha ki namaz ka tarika in Hindi)

अगर आप ईशा की चार रकात फर्ज की नमाज की पहली रकात पढ़ने का तरीका हम आपको नीचे बता रहे है है

सबसे पहले आपको सना – सना सुब्हानका अल्लहुमा वबी हमदिका पढ़नी है

उसके बाद आपको बिस्मिल्लाह करना है|

जब आप बिस्मिल्लाह पढ़ लें, फिर आपको एक मर्तबा सूरह फातिहा पढ़नी है, उसके बाद आपको जो भी सूरह याद हो उसे भी एक मर्तबा पढ़ें।

सूरह पढ़ने के बाद आपको अल्लाहु अकबर बोलते हुए रुकू में जाना है, रुकू के दौरान आपको कम से कम तीन मर्तबा सुब्हान रब्बिल अजीम बोलना है|

फिर आप समी अल्लाह हुलेमन हमीदा बोलते हुए खड़े हो जाएँ, खड़े होने के बाद एक मर्तबा रब्बना लकल हम्द भी बोलें,

उसके बाद अल्लाहु अकबर बोलते हुए आप दोनों सजदे के लिए जाएंगे, सजदा करते वक्त आपको कम से कम तीन बार सुब्हान रब्बि यल आला बोलें, उसके बाद अल्लाहु अकबर बोलते हुए दूसरी रकात के लिए खड़े हो जाएँ |

दूसरी रकात पढ़ने का तरीका (isha ki namaz ka tarika)

दूसरी रकात पढ़ने के लिए सबसे पहले आपको बिस्मिल्लाह हिर्रहमा निर्रहीम पढ़ना है, उसके बाद एक मर्तबा सूरह फातिहा यानि अल्हम्दु लिल्लाह पढ़नी है|

फिर आपको क़ुरान शरीफ की जो भी सूरह याद हो उसे पढ़ लें|

सूरह पढ़ने के बाद आपको रुकू के लिए जाना है, रुकू के दौरान आपको कम से कम तीन बार सुब्हान रब्बिल अजीम बोलना है|

उसके बाद आपको समी अल्लाह हुलेमन हमीदा बोलते हुए अच्छी तरह से खड़े हो जाएँ, खड़े होने के बाद एक मर्तबा रब्बना लकल हम्द भी बोलें|

उसके बाद आपको अल्लाहु अकबर बोलते हुए दोनों सजदे के लिए जाना है और सजदा करते समय कम से कम आप 3 बार सुब्हान रब्बि यल आला बोलना है|

उसके बाद आपको अपने पंजो पर अल्लाहु अकबर बोलते हुए ऐसे बैठना है जैसे आप नमाज में बैठे हो|

जब आप सही से बैठ जाएं तब अत्तहियातु लिल्लाहि बोलते हुए अपनी शहादत की ऊँगली को ऊपर उठायें और उसके बाद अल्लाहु अकबर बोलते हुए आपको तीसरी रकात के लिए खड़े हो जाना है|

तिसरी रकात पढ़ने का तरीका (isha ki namaz ka tarika i

ईशा की चार रकात नमाज की तीसरी रकात में ना तो आपको सना बोलनी है और ना ही कुरान शरीफ की कोई सुरह बोलनी है|

इसमें आपको बिस्मिल्लाहहिर्रहमा निर्रहीम बोलकर एक मर्तबा सूरह फातिहा पढ़ें|

सूरह फातिहा पढ़ने के बाद आप अल्लाहु अकबर बोलते हुए रुकू में जाएंगे और रुकू के दौरान कम से कम 3 मर्तबा सुब्हान रब्बिल अजीम बोलेंगे|

रुकू के बाद आप समी अल्लाह हुलेमन हमीदा बोलते हुए खड़े हो जाएंगे, खड़े हो जाने पर 1 मर्तबा रब्बना लकल हम्द बोलें और फिर उसके बाद अल्लाहु अकबर बोलते हुए सजदे में जाएं| सजदे के दौरान आपको कम से कम आप 3 बार मर्तबा सुब्हान रब्बि यल आला बोलना है फिर उसके बाद अल्लाहु अकबर बोलते हुए चौथी रकात के लिए खड़े हो जाएंगे|

चौथी रकात पढ़ने का तरीका (isha ki namaz ka tarika)

चौथी रकात में सबसे पहले आप बिस्मिल्लाह हिर्रहमा निर्रहीम बोलें, फिर सूरह फातिहा यानि के अल्हम्दुलिल्लाह बोलें|

फिर अल्लाहु अकबर बोलते हुए रुकू में जाएंगे और रुकू के दौरान कम से कम 3 बार सुब्हान रब्बिल अजीम बोलेंगे|

उसके बाद आप अल्लाह हुलेमन हमीदा बोलते हुए खड़े हो जाएंगे, खड़े होने पर एक मर्तबा रब्बना लकल हम्द बोलेंगे|

उसके बाद अल्लाहु अकबर बोलते हुए दोनों सजदे के लिए जाएंगे और सजदे के दौरान कम से कम आप 3 बार सुब्हान रब्बि यल आला बोलेंगे|

दोनों सजदे करने के बाद आप पंजो पर ऐसे बैठेंगे जैसे नमाज़ के समय बैठते है, फिर 1 बार अत्तहियातु लिल्लाहि बोलते हुए अपनी शहादत के ऊँगली को उठाएंगे|

फिर इसके बाद 1 बार दरूदे इब्राहिम और उसके बाद एक बार दुआ ए मासुरा बोलेंगे।

इसके बाद आप दोनों और सलाम फेरेंगे, बस यहां पर आपकी ईशा की चार रकात फर्ज की नमाज मुकम्मल हो गई है।

ईशा की 2 रकात सुन्नत नमाज का तरीका 

अगर आप ईशा की दो रकात सुन्नत नमाज़ का तरीका जानना चाहते है तो हम आपको ईशा की दो रकात सुन्नत की नमाज पढ़ने का तरीका के बारे में बता रहे है

ईशा की 2 रकात सुन्नत नमाज की पहली रकात पढ़ने का तरीका (isha ki namaz ka tarika)

सबसे पहले आपको ईशा की दो रकात नमाज की नियत करनी होती है, अगर आपको दो रकात सुन्नत नमाज की नियत के बारे मालूम नहीं है तो आप ऊपर पढ़ सकते है, चलिए अब हम आपको ईशा की दो रकात सुन्नत नमाज की पहली रकात का तरीका बताते है

सबसे पहले आप सना – सुब्हानका अल्लहुमा वबी हमदिका पढ़ें|

उसके बाद आउज़ बिल्लाहे मिन्नस सैतानिर्रजिम पढ़ लें

उसे बाद अल्हम्दु लिल्लाह पढ़ें

फिर क़ुरान शरीफ की कोई भी एक सूरह जो आपको याद हो उसे पढ़ लें|

फिर आपको अल्लाहु अकबर बोलते हुए रुकू में जाना है और रुकू के दौरान कम से कम 3 बार सुब्हान रब्बिल अजीम बोलना है|

उसके बाद आप समी अल्लाह हुलेमन हमीदा बोलते हुए खड़े हो जाएँ और फिर 1 बार रब्बना लकल हम्द बोलें|

उसके बाद आपको अल्लाहु अकबर बोलते हुए दोनों सजदे के लिए जाना है, दोनों सजदे करते समय आपको कम से कम 3 बार सुब्हान रब्बि यल आला बोलना है|

उसके बाद आप अल्लाहु अकबर बोलते हुए दूसरी रकात के लिए खड़े हो जाना है|

ईशा की 2 रकात सुन्नत नमाज की दूसरी रकात पढ़ने का तरीका  (isha ki namaz ka tarika)

ईशा की दो रकात सुन्नत नमाज की दूसरी रकात पढ़ने का तरीका बिलकुल पहली रकात की तरह ही है, दूसरी रकात में भी आपको वैसे ही सभी काम करने है, जैसे आपने पहली रकात में किए थे| दूसरी रकात में पहली रकात से थोड़ा अंतर है जिसके बारे में हम आपको नीचे बता रहे है

दरसल दूसरी रकात में सजदा करने के बाद खड़ा नहीं होना है, बल्कि आपको दोनों सजदे करने के बाद अपनी पंजो पर ऐसे बैठना है जैसे हम नमाज के वक्त बैठते है|

पंजो के बल बैठने के बाद आपको सबसे पहले 1 बार अत्तहियातु लिल्लाहि बोलते हुए अपनी शहादत की ऊँगली को उठाना है|

फिर आपको 1 बार दरूद शरीफ पढ़ना है और फिर एक बार दुआ ए मासुरा भी पढ़ लें|

उसके बाद अस्सलामो अलैकुम वरहमतुल्लाह बोलते हुए पहले दाएं मुंह पर और फिर अस्सलामो अलैकुम वरहमतुल्लाह बोलते हुए बाएं मुंह पर सलाम फेर लें

ईशा की 2 रकात नफिल नमाज़ का तरीका 

ईशा की दो रकात नफिल नमाज पढ़ने के लिए सबसे पहले आपको नफील नमाज़ की नियत करनी होती है, नफिल नमाज की नियत हमने ऊपर दी है,

ईशा की दो रकात नफिल नमाज की पहली रकात का तरीका (isha ki namaz ka tarika)

सबसे पहले सुब्हानका अल्लहुमा वबी हमदिका पढ़ें

उसके बाद एक बार सूरह फातिहा पढ़ें |

फिर उसके बाद अल्लाहू अकबर बोलते हुए रुकु में जाना है, रुकू में आपको कम से कम तीन बार सुबहाना रब्बी यल अज़ीम बोलना है|

रुकू करने के बाद समी अल्लाह हुलेमन हमीदा बोलते हुए खड़े हो जाएं, फिर अल्लाहू अकबर बोलते हुए सजदे में जाएं।

सजदा करने के बाद अल्लाहु अकबर बोलते हुए दूसरी रकात के लिए खड़े हो जाना है

ईशा की दो रकात नफिल नमाज की दूसरी रकात का तरीका  (isha ki namaz ka tarika)

ईशा की दो रकात नफिल नमाज की दूसरी रकात में आप पहली रकात वाली हर चीज दोहराएंगे, दूसरी रकात में सजदा करने के बाद आपको तशहुद में बैठ जाना है।

बैठने के बाद आपको एक बार अत्तहियातु लिल्लाहि बोलते हुए अपनी शहादत की ऊँगली को उठाना है|

फिर आपको एक बार दरूद शरीफ पढ़ना है|

दरूद शरीफ पड़ने के बाद एक बार दुआ ए मासुरा पढ़ना है|

दुआ ए मासुरा पड़ने के बाद सलाम फेर लें|

वीतिर की तीन रकात नमाज़ का तरीका 

वितिर की नमाज़ को खास नमाजो में से एक माना जाता है, वीतिर की नमाज को दिन में केवल एक बार पढ़ा जाता है, चाहे आप इसे ईशा के वक्त पढ़ लें या तहज्जुद के समय पढ़ लें| यह तो हम सभी जानते ही है की पांचो वक़्त की नमाज में सुन्नत और नफील नमाज़ को पढ़ा जाता है लेकिन वीतिर की नमाज केवल एक बार ही पढ़ी जाती है वो भी ईशा की नमाज के समय, ऐसा करने की वजह यह है वीतिर की नमाज रात की नमाज होती है| वितिर की नमाज को इमाम साहब नहीं पढ़ाते हैं, बल्कि इस नमाज को खुद ही पढ़ना होता है।

ईशा की 2 रकात नफिल नमाज़ का तरीका 

ईशा की नमाज की आखिरी नमाज दो रकात नफिल नमाज होती है, ईशा की दो रकात नफिल नमाज को पड़ने से पहले नफिल नमाज की नियत करनी होती है, जिसके बारे में हमने आपको ऊपर बताया है|

ईशा की दो रकात नफिल नमाज की पहली रकात पढ़ने का तरीका

सबसे पहले आपको सुब्हानका अल्लहुमा वबी हमदिका पढ़ना है|

उसके बाद आउज़ बिल्लाहे मिन्नस सैतानिर्रजिम पढ़ लें|

फिर आप अल्हम्दु लिल्लाह पढ़ लें|

उसके बाद क़ुरान शरीफ की जो भी सौराह आपको बाद हो उसे पढ़ लें|

फिर अल्लाहु अकबर बोलते हुए आपको रुकू में जाना है, रुकू के दौरान आपको कम से कम तीन बार सुब्हान रब्बिल अजीम पढ़ना है|

रुकू करने के बाद समी अल्लाह हुलेमन हमीदा बोलते हुए खड़े हो जाना है|

उसके बाद अल्लाहु अकबर बोलते हुए दोनो सजदे के लिए जाना है और सजदे के दौरान कम से कम आप तीन बार सुब्हान रब्बि यल आला बोलें|

उसके बाद अल्लाहु अकबर बोलते हुए दूसरी रकात के लिए खड़े हो जाना है

ईशा की दो रकात नफिल नमाज की दूसरी रकात पढ़ने का तरीका 

दो रकात नफिल नमाज की दूसरी रकात में सबसे पहले आप पहली रकात की तरह सजदा करें|सजदा करने के बाद आपको अल्लाहु अकबर बोलते हुए ऐसे बैठना है जैसे आप नमाज़ में पंजो के बल बैठते है|

उसके बाद एक बार अत्तहियातु लिल्लाहि बोलते हुए अपनी शहादत की ऊँगली को उठा लें|

फिर एक बार दरूद शरीफ पढ़ लें|

फिर एक बार दुआ ए मासुरा पढ़ लें|

दुआ ए मासुरा पढ़ने के बाद और सलाम फेर लें|

बस आपकी ईशा की दो रकात नफिल नमाज मुकम्मल हो गई है|

ईशा की नमाज़ की फ़ज़ीलत 

यह तो आप समझ ही गए होंगे की ईशा की नमाज काफी ज्यादा लम्बी होती है, लम्बी होने की वजह से काफी सारे इंसान इस नमाज को पूरा नहीं पढ़ते है| चलिए अब हम आपको ईशा की नमाज की फजीलत के बारे में बताते है

1 – कोई भी मुस्लिम भाई ईशा की नमाज सही वक्त पर पढ़ता है तो वो फजर के समय तक हर बुरी ताकतों से महफ़ूज़ रहता है|

2 – ऐसा माना गया है की जो भी शख्स ईशा की नमाज पढ़ने के बाद सोता है उसकी हिफाजत सुबह तक फरिश्ते करते है|

3 – ईशा की नमाज काफी लंबी होने की वजह से इसे पढ़ने में काफी समय लगता है, लेकिन कया आप जानते है की अल्लाह को लंबी रकाते बहुत ज्यादा पसंद होती है| इसीलिए ईशा की नमाज अदा करने से बहुत ज्यादा सवाब मिलता है|

हम उम्मीद करते है की आपको हमारे लेख ईशा की नमाज का तरीका में दी गई जानकारी पसंद आई होगी, इस लेख को अधिक से अधिक शेयर करें जिससे यह लेख ऐसे मुस्लिम भाई और बहन के पास पहुँच जाएं जिन्हे ईशा की नमाज पढ़ने का तरीका मालुम ना हो|

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