मौला अली मुश्किल कुशा हज़रत अली का मोजिज़ा – Hazrat Ali ka Mojiza

हज़रत अली का मोजिज़ा बहुत सी मशहूर है जिसने भी इसे सुना मुराद उसकी ज़रूर पूरी हुई.

मौला अली मुश्किल कुशा हज़रत अली का मोजिज़ा को पढ़ने का तरीका

कभी भी आप पे कोई भी मुश्किल हो या आप बहुत परेशां हो तो आप खुलूसे दिल से मन्नत मान ले के मेरी मुश्किल दूर हो जाए तो मैं मौला मुश्किल कुशा हज़रत अली का मोजिज़ा पढ़ूगा / पढ़ूगी।

जब आपकी मुश्किल दूर हो जाए तो आप यह मोजिज़ें को पढ़े और मीठे पे नियाज़/नज़र दिलाए.

नियाज़/नज़र हज़रत अमीरल मोमेनीन अली अ.स. दिलाने का तरीका

१. अव्वल व आखिरी ३ बार दरूद/सलवात पढ़े
२. सूरेह कुल्होवल्लाह ३ बार पढ़े
३. उसके बाद सूरेह फातेहा पढ़े
४. उसके बाद िन्ना अन्ज़लना पढ़े

यह सारी दुआ पढ़ के इसका सवाब अमीरल मोमेनीन और आपके अजदाद की रूह को पहुंचाए और खुलूसे दिल से मौला मुश्किल कुशा से दुआ करे और अपनी हाजत तालाब करे. इस मोजिज़ें के करम से आपकी साडी मुश्किल हल हो जाएगी और आप की साडी दिली मुराद पूरी होगी. अमीन

मौला अली मुश्किल कुशा का मोजिज़ा हिंदी में – लकड़हारे की कहानी

किसी शहर में एक लकड़हारा (लकड़ी काटने वाला) रहता था हर रोज जंगल जाता लकडिया काटता और शहर में लाता, ला कर फरोख्त करता और बच्चो का पेट पालटा, ऐक रोज लकडिया नहीं फरोख हुई रात हो गई ख्याल किया, के खाली हाथ घर जाऊं? बच्चे भुख से बेकरार होंगे इनकी बेचैनी देख कर और सदमा होगा बेहतर है कि रात इसी जगह जंगल में बसर करू सुबह को लकडिया फरोख्त कर के घर जाऊंगा इसका बयान ये है कि जंगल में ही रह गया, आधी रात को इक सवार मू पर नकाब डाले किबले की तरफ से नमुदार होवा और पूछा तू कोन है? लड़के ने जवाब दिया एक लकड़हारा बेकसो नचार हु हमेशा जंगल में जाकर लकड़िया लता हु मगर आज बद किस्मती से लकडइया नहीं बिकी इस सबब से मैं यहाँ रह गया. जब सुबह होगी इसको फरोख्त करके कुछ सामान घर लेके जाओगे और बीवी बच्चो को जो रात भर के भूके प्यासे बेक़रार होते होंगे इनको खाना खिला पीला के खुश करऊगा। तब नकाब पोश ने लकड़हारे को पांच पैसे देकर फ़रमाया. इस पैसो में से दो पैसे का मुनक्का एक पैसे की मिस्री, ढेले के चने, ढेले की कलिया और ढेले का फूल लेकर मौला मुश्किल कुशा के नाम से फातेहा दे. खुदा तेरी मोहताजी को इस फातेहा की बरकत से दूर करेगा.

लकड़हारे ने निहायत ख़ुशी से इन पैसो को पहलू में बांध लिया, लकड़हारे को गुनूदगी सी मालूम हुई क्या देखता है न वो सवार है न वो जगह. सुबह अपनी झोपड़ी में बैठा है और लकडीयूओ का गट्ठर घर में पड़ा है. और सुबह हो गई. लकड़हारे ने अपनी औरत को जगाया और शब् की हालत अपनी बीवी से बयां की। और अमीरल मोमेनीन मौला मुश्किल कुशा के नाम से फातेहा दिलवाने का ज़िकर किया. फिर इसी वक़्त मिया बीवी नाहा धो कर असबाबे फातेहा खरीद लाए। और फातेहा अमीरल मोमेनीन मौला मुश्किल कुशा कि दिलवाई और दोनों ने मिल कर खाई इस रोज़ लकड़हारे का गट्टर दो गुनी कीमत पर बिका. और तमाम बच्चो ने पेट भर के खाया और निहायत ख़ुशी से रहे.

दूसरे रोज़ लकड़हारा अपनी कदीम आदत के मवाफ़िक़ अपने हथियार जंगल की तरफ लेकर गया पहलु का सूखा दरख़्त नज़र आया बिस्मिल्लाह कह कर एक हाथ मारा तो दरख़्त ज़मीन पर शक होकर गिरा. खुदा की कुदरत से एक खज़ाना इस में नमूदार हुआ. लकड़हारा बहुत खुश हुआ और सज्दए शुक्र अदा किया और चंद अशर्फिया इसमें से लेकर बाजार गया और खाने पिने का सामान लेकर एक बाग़ में निहायत वसी और उम्दा माकन बनवाया मुसाफिर खाना , लंगर खाना आबदार खाना और बहुत से नौकर चाकर हर काम पे मोकररर कर दिए. और निहायत ख़ुशी से रहने लगा एहले शहर और मुसाफिरों को ज़रो माल से बे परवाह किया.

एक दिन शहर का बादशाह बे कसदे शिकार इस जंगल की तरफ निकला प्यास से बेकर्रार होकर खिदमत गारो को हुकम दिया की पानी जल्द लाओ प्यास से मेरी बुरी हालत है। नौकर चारो तरफ फैल गए और पानी तलाश करने लगे किसी को दूर से शहर पनाह की चार दीवारी नज़र आई जल्द जल्द क़दम उढ़ा कर नज़दीक आया एक निहायत आलीशान फाटक देखा इसके अंदर गया क्या देखा के वह एक आबदार खाना है. कई खिदमत गार है हर एक अपने अपने काम पर लगा है.

इनसे पानी माँगा इन्होने एक सुराही और एक प्याला इसके हवाले किया इसके बाद मुलाज़िम वो सुराही बादशाह के पास ले गाए बादशाह इसी पिते ही निहायत खुश हुआ पूछा की यह सुराही, यह हुसन दरिंदो के मस्कन में ऐसा उम्दा और नफीस पानी किसने दिया? अर्ज़ किया खुदा वनदे ने बरसो पहले एक लकड़हारे ने इस जंगल में शहर बसाया है. मुसाफिर, गरीब,मोहताज,और हाजत मंदो को माला माल कर दिया है.वो इस शहर से बहुत करीब है वहा से लाया हु. बादशाह और भी खुश हुआ कहा के हम ने यहाँ बस्ती का नामो निशान भी न देखा था न सुना था. हुकम दिया के लकड़हारे को अभी अहलो अयाल यहाँ हाज़िर करो. अमीर वज़ीर माने हुए को ऐसे लोगो को बुलवाना हुज़ूर के लाइक नहीं है. फिर किसी और वक़्त इसकी तलबी हो जाएगी. गरज़ बादशाह वापस चला गया. और अपनी बेगम से सब वारदात ज़ाहिर की. बेगम ने दोनों को बुलाने का बहुत इसरार किया इसकी खातिर इनकी तलबी हुई बहुत सी अशरफिया नज़र की लकड़हारा बाहर और इसकी बीवी बेगम के हुजरे में चली गई.

एक दिन बेगम ने हमांम जाते वक़्त अपना नौ लाख हार गले से उतार के खुटी पर लटका दिया और लकहारनी को हिफाज़त के लिए ताकीद की लेकिन वो खुटी हार निगल गई और लकहारनि ने यह कैफियत बचश्मे खुद देखि जब बेगम हम्माम से फारिग हुई तो हार तलब किया. वो हैरत ज़दा रह गई और कोई जवाब न दे सकी. बेगम और बादशाह ने खफा हो कर इन दोनों को क़ैदखाने पंहुचा दिया। साल कामिल इसी क़ैद खाने में दोनों ने गुज़ारे.

एक रात वही सवार खाव्ब में आया और कहा की फातेहा जनाबे अमीरल मोमेनीन के नाम से दिलवाया था या नहीं. तब सवार ने कहा यही सबब है जो तुम मुसीबत और क़ैद में हो अब फातेहा दो। लकड़हारे ने कहा मेरे पास पैसे तो नहीं है वो सवार बोला तेरे बिस्तर के निचे है इन को लेकर फातेहा दे. तब लकड़हारे ने बेदार हो कर वो पैसे उढा लिए और दोनों ने हाथ पैर की बेड़िया खुली पाई.

दोनों नाहा धु कर असबाबे फातेहा मांगने की फ़िक्र में थे की एक औरत नज़र आई इससे कहा अमीरल मोमेनीन मौला मुश्किल कुशा की फातेहा का सामान हमें खरीद कर लादे इसने जवाब दिया आज मेरे बेटे का शब्ए गश्त है. और मुझे काम है मैं नहीं ला सकती. यह कह कर चली गई. इसके बाद एक बुढ़िया आई जिसका लड़का मर गया था इसकी तकफीम का सामान लेने रोते पीटते जा रही थी. इसको देख कर पुकारा और सामाने फातेहा लाने को कहा. जब बुढ़िया ने मौला अली का नाम सुना अपने ज़रूरी काम का ख्याल न किया. और इसी वक़्त नाहा धो कर असबाबे फातेहा का लाकर दिया. लकड़हारा और लकहारनी ने फातेहा देकर खुद भी खाया और इस भुड़िया को भी दिया इस चीज़ को भुड़िया ने खाया और बाकि को घर लाइ इस का मरा हुआ बेटा ज़िंदा हो गया और जो औरत फातेहा का सामान नहीं लाइ इसका ज़िंदा बेटा जिसकी शादी हो रही थी वो मर गया. गरज़ इस बुढ़िया से इसकी ज़िन्दगी का सबब पूछा? बोली लकड़हारे को मौला अली की फातेहा का सामान लेकर दिया। और मौला का नाम सुनते ही किसी तरह मना न किया। शायद इसी की बरकत से मेरा मरा हुआ बेटा ज़िंदा हो गया.

तब वो समझी और निहायत अफ़सोस से कहने लगी के मैंने हज़रत अमीरल मोमेनीन अली की नज़र का सामान फला को लेकर न दिया इस लिए मेरा ज़िंदा बेटा मर गया. शादी का घर मातम गाह बन गया फिर वो औरत इस बेजा हरकत से नादिम हुई आहोजारी की और तौबा कर के सदक़ए दिल से नियत कर अगर मेरा बेटा ज़िंदा हो गया तो मैं भी फातेहा किया करुँगी।
इस फातेहा की बरकत से इस औरत का बेटा ज़िंदा हो गया. और वो खुटी जिसने हार निगल लिया था फिर उगलना शुरू किया. यह हाल बेगम ने देख कर बादशाह को बुलाया तब बादशाह को यकीन आया और बोला की लकड़हारा और इसकी बीवी बे जुरमो खता है और इसी वक़्त इनकी रिहाई के वास्ते कैद खाने के दरोगा को हुकम दिया दरोगा कैद खाने में आया क्या देखा इन दोनों के पाओ की बेड़िया खुद बा खुद निकल पड़ी है वो निहायत मुत्तरीह हुआ और दोनों को बादशाह के दरबार में यह वारदात बयां की बादशाह को ज़्यादा ताज्जुब हुआ और पूछा की तुम ने ऐसा क्या काम किया जो ऐसी करामते ज़ाहिर हुई ?
तब दोनों ने कहा जनाबे अमीरल मोमेनीन अली का फातेहा हर पंज शम्बा को किया करते थे गफलत के सबब कई रोज़ छूट गए इसी सबब से हम दोनों ऐसी मुसीबत में गिरफ्तार हुए.

अब इस फातेहा मुबारक को शुरू किया है बरकत से इस नामे पाक के खुदाए ताला ने हमें इस क़ैद खाने से निजात बक्शी. बश्शाह ने इन दोनों को बाइज़्ज़त रुखसत किया और हर पंज शम्बा को फातेहा हज़रात अमेरल मोमेनीन अली के नाम पाक से देना शुरू किया.

तबसे बादशह हमेशा आने दुश्मनो पर ग़ालिब रहा बहुत सा मिलके फातेहा किया और बहुत माल और खज़ाना इसके हाथ लगा.
गरज़ जो शख्स इस फ़तेहै को सदकए दिल से और पाकीज़गी के साथ हर पंज शम्बा को फातेहा किया करेगा। इसकी बरकत से दुनिया की तमाम आफत और बलाइयत से अमान में रहेगा। इसकी उम्र और रिज़्क़ में बरकत होगी और इसके दुश्मनान व बाद खव्हान व हादसे मक हूर व मरदूद होन्गे। और वो हमेशा इस मुबारक फ़तेहे की बरकत से बाइज़्ज़त रहेगा। इसके फायदे बेशुमार है. जिसने लिखा नहीं जा सकता।

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