Surah Muzammil in Hindi with Translation – सूरह मुज़म्मिल

Surah Muzammil कुरान की 73वीं सूरह है। यह सूरह मक्का में नाज़िल हुई है और इसमें 20 आयतें हैं। इस सूरह का नाम “मुज़म्मिल” शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ है “कपड़ा ओढ़े हुए व्यक्ति”। इस सूरह में पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को रात में उठकर नमाज पढ़ने और कुरान पढ़ने का हुक्म दिया गया है। सूरह मुज़म्मिल कुरान की 29 पारा में है जिसमे 20 आयत, 200 लफ्ज़ और 854 हर्फ़ मौजूद है. हम आपको Surah Muzammil in Hindi इस ब्लॉग पोस्ट में बताने जा रहे हैं आप इसको पढ़ कर इसका सवाब ले सकते हैं

सूरह मुज़म्मिल की अहमियत (Importance of Surah Muzammil)

सूरह मुज़म्मिल क़ुरान का एक बहुत ही अहम सूरह है क्योंकि यह पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कई महत्वपूर्ण हुक्म देती है। इन हुक्म में रात में उठकर नमाज पढ़ना, कुरान पढ़ना, अल्लाह की याद में रहना, गुनाहों से बचना, ज़रूरतमंदों की मदद करना से बचना शामिल हैं। जो शख्स Surah Muzammil Hindi mein या किसी भी तरह से पढता है, अल्लाह उसको बुरे कामो से और लोगो की गुलामी से महफूज़ रखेगा।

Surah Muzammil Hindi

Surah Muzammil in Hindi

बिस्मिल्ला हिर रहमानिर रहीम

1.  या अय्युहल मुज़ ज़ममिल

ऐ चादर ओढने वाले !

2. क़ुमिल लैला इल्ला क़लीला

कुछ हिस्से को छोड़ कर रात में नमाज़ अदा कीजिये

3. निस्फहू अविन क़ुस मिन्हु क़लीला

यानि आधी रात या उस से कुछ कम

4. अव्ज़िद अलैहि वरत तिलिल कुरआन तरतीला

या आधी से कुछ ज़्यादा, और ठहर ठहर कर क़ुरान पढ़िए

5. इन्ना सनुल्की अलैका कौलन सक़ीला

अनक़रीब हम आप पर एक भारी फरमान उतारेंगे

6. इन्न नाशिअतल लैलि हिया अशद्दु वत अव वअक्वमु कीला

यक़ीनन रात के वक़्त उठना ही ऐसा अमल है जिस से नफ्स को अच्छी तरह कुचला जाता है और बात भी बेहतर तरीके पर कही जाती है

7. इन्ना लका फिन नहारि सबहन तवीला

और दिन में तो आप बहुत सारा काम करते हो

8. वज कुरिस्मा रब्बिका व तबत तल इलैहि तब्तीला

और अपने परवरदिगार का नाम लेते रहिये और सब से बे ताल्लुक़ होकर उसी की तरफ़ मुतवज्जह हो जाइए

9. रब्बुल मशरिकि वल मगरिबि ला इलाहा इल्ला हुवा फत तखिज्हू वकीला

वही मशरिक़ व मगरिब का मालिक है, उस के सिवा कोई माबूद नहीं इसलिए आप इसी को कारसाज़ बनाइये

10. वसबिर अला मा यकूलूना वह्जुर हुम हजरन जमीला

और ये लोग जो कुछ कहते हैं, उस पर सब्र कीजिये और ख़ूबसूरती के साथ उन से अलग हो जाइये

11. वज़रनी वल मुकज्ज़िबीना उलिन नअ,मति वमह हिल्हुम क़लीला

और तुम्हें झुटलाने वाले जो ऐशो इशरत में पड़े हुए हैं उन का मामला मुझ पर छोड़ दो और उन्हें थोड़े दिन और मोहलत दो

12. इन्ना लदैना अन्कालव वजहीमा

यक़ीनन हमारे पास सख्त बेड़ियाँ हैं, और दहकती हुई आग है

13. व तआमन ज़ा गुस्सतिव व अज़ाबन अलीमा

और गले में अटक जाने वाला खाना और दर्दनाक अज़ाब भी

14. यौमा तरजुफुल अरजु वल जिबालु व कानतिल जिबालु कसीबम महीला

उस दिन ज़मीन और पहाड़ कांपने लगेंगे और पहाड़ रेत के टीले हो जायेंगे

15. इन्ना अरसलना इलैकुम रसूला शाहिदन अलैकुम कमा अरसलना इला फ़िरऔना रसूला

हम ने तुम्हारे तरफ एक ऐसे रसूल को भेजा है जो तुम पर गवाही देंगे जैसा कि हम ने फिरऔन की तरफ़ पैग़म्बर भेजा था

16. फ़असा फ़िरऔनुर रसूला फ़अख्ज्नाहू अख्ज़व वबीला

फिर फिरऔन ने पैगमबर का कहा न माना तो हम ने उसे सख्ती से पकड़ की

17. फ़कैफ़ा तत तकूना इन कफरतुम यौमय यजअलुल विल्दाना शीबा

तो अगर तुम कुफ्र करते रहोगे तो उस दिन से कैसे बचोगे जो बच्चों को बूढ़ा कर देगा

18. अस समाउ मुन्फतिरुम बिह कान वअदुहू मफ़ऊला

उस दिन आसमान फट जायेगा और उस का वादा पूरा होकर रहेगा

19. इन्ना हाज़िही तज्किरह फ़मन शाअत तखज़ा इला रब्बिही सबीला

ये तो एक नसीहत है, तो जो चाहे अपने परवरदिगार की तरफ रास्ता बना ले

20. इन्ना रब्बका यअलमु अन्नका तकूमु अदना मिन सुलुसयिल लैलि व निस्फहू व सुलुसहू व ताइफतुम मिनल लज़ीना मअक वल्लाहु युक़द्दिरुल लैला वन नहार

आप के परवरदिगार खूब जानते हैं कि आप और जो लोग आप के साथ हैं, उन में से कुछ लोग दो तिहाई रात के क़रीब और ( कभी ) आधी रात और ( कभी ) तिहाई रात अल्लाह के करीब खड़े रहते हैं और अल्लाह ही रात और दिन की तादाद मुक़र्रर करते हैं

अलिमा अल लन तुह्सूहू फताबा अलैकुम फकरऊ मा तयस सरा मिनल कुरआन अलिमा अन सयकूनु मिन्कुम मरजा व आखरूना यजरिबूना फ़िल अरज़ि यब्तगूना मिन फजलिल लाहि व आख़रूना युकातिलूना फ़ी सबीलिल लाहि

अल्लाह तआला ने जान लिया कि तुम उसको निबाह न सकोगे इसलिए उस ने तुम पर मेहरबानी की, लिहाज़ा जितना क़ुरआन आसानी से पढ़ सको, पढ़ लिया करो, अल्लाह को मालूम है कि तुम में से बीमार भी होंगे, और कुछ तलाश व मआश के लिए ज़मीन में सफ़र भी करेंगे, कुछ और लोग अल्लाह के रस्ते में जिहाद करेंगे

फकरऊ मा तयस सरा मिनहु व अक़ीमुस सलाता व आतुज़ ज़काता व अकरिजुल लाहा करजन हसना

इसलिए जितना आसानी से हो सके, पढ़ लो, नमाज़ की पाबन्दी करो, ज़कात देते रहो, अल्लाह को अच्छी तरह क़र्ज़ दो

वमा तुक़ददिमू लि अन्फुसिकुम मिन खैरिन तजिदूहू इन्दल लाहि हुवा खैरव व अ’अज़मा अजरा वस ताग्फिरुल लाह इन्नल लाहा गफूरुर रहीम

और तुम अपने लिए जो नेक अमल आगे भेजोगे, उसको अल्लाह के पास ज़्यादाबेहतर और ज़्यादा सवाब वाला पाओगे, और अल्लाह से मगफिरत तलब करते रहो, यक़ीनन अल्लाह बड़े बख्शने वाले और बड़े महेरबान हैं

सूरह का सार 

Surah Muzammil की शुरुआत में पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को रात में उठकर नमाज पढ़ने और कुरान पढ़ने का हुक्म दिया गया है। अल्लाह ने कहा है कि पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को रात में उठकर नमाज पढ़ने और कुरान पढ़ने से बहुत फायदा होगा।

सूरह (Surah Muzammil in Hindi) में यह भी बताया गया है कि पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कुरान और क़ुरान की बातों को दुसरे लोगों तक पहुंचाने और लोगों को अल्लाह की राह पर बुलाने का हुक्म दिया गया है। अल्लाह ने कहा है कि पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को लोगों को अल्लाह की ओर बुलाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन उन्हें हार नहीं माननी चाहिए। उन्हें अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और उनके हुक्म को बजा लाना चाहिए।

 

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