Surah Juma In Hindi With Tarjuma-सूरा जुमा

सूरा जुमा: पैग़ाम का दिन

सूरा जुमा कुरान का 62वां सूरेह है और यह इस्लाम में जुमा के दिन (शुक्रवार) के एहमियत को उजागर करता है। Surah Juma In Hindi-सूरा जुमा एक छोटा लेकिन ताकतवर सूरा है जो मुसलमानों को इस दिन की खासियत के बारे में याद दिलाता है और उन्हें हुकम देता है कि वे अपनी दुनयावी मसरूफियत को तर्क करके इज्तेमाई दुआ में शामिल हो.

सूरह का नाम        सूरह अल-जुमुअ़ह
पारा नंबर                        28
कुल आयते                        11
कुल अल्फ़ाज़                      772
सूरह नंबर                        62
कुल सब्द                        177
कुल रुकू                           2

sureh juma in hindi

Surah Juma In Hindi With Tarjuma- सूरा जुमा की एहमियत

सूरा जुमा मुसलमानों के लिए एक अहम् याददहानी है कि जुमा का दिन उनके हफ्ते का सबसे खास दिन है। जुमे की नमाज़ के दिन वे अपने वे अपने बिरादरी के साथ जुड़ते हैं, एक साथ दुआ करते हैं और एक दूसरे के हसी- ख़ुशी में शामिल होते हैं। यह वह दिन भी है जब वे अपने गुनाहो की माफ़ी भी मांगते है और अल्लाह से सीधे रस्ते पे क़ायम रहने की दुआ भी करते है और कामियाबी के लिए दुआ भी करते है.

सूरा जुमा की कहा से आई ?

सूरा जुमा मदीना में पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर वही के ज़रिये से उतारी गई थी। इस सूरा के उतरने के बाद, पैगंबर मुहम्मद ने जुमा की दुआ को वाजिब कर दिया और मुसलमानों को इस दिन को पाक और अल्लाह की इबादत में कुर्बान करने का पैगाम दे दिया।

सूरह जुमा हिंदी में – Surah Juma In Hindi With Tarjuma

अ ऊजु बिल्लाहि मिनश शैतानिर रजीम

बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम

1. युसब्बिहू लिल लाहि मा फिस सामावति वमा फिल अरज़िल मलिकिल कुद्दूसिल अजीज़िल हकीम

तर्जुमा : वो अल्लाह जिसने तमाम आसमान व ज़मीन बनाई वो ही ग़ालिब है, पाक और हिकमत वाला है.

2. हुवल लज़ी बअस फिल उममिय यीना रसूलम मिन्हुम यतलूना अलैहिम आयातिही व युज़क कीहिम व युअल्लिमु हुमुल किताब वल हिकमह वइन कानू मिन क़ब्लु लफ़ी ज़लालिम मुबीन

तर्जुमा: बस यही एक खुदा है जिन्होंने उन अनपढ़ लोगो में से एक नबी बना के भेजा जो आयतो को पढ़ के सुनाते है उनको अक़ीदा वा अमल के गन्दगी से पाक व साफ़ बनाते है और उन लोगो को किताब और हिकमत की तालीम भी देते है हालाकी उससे पहले ये लोग गुमराही में पड़े थे.
3. व आखरीन मिन्हुम लम्मा यल्हकू बिहिम वहुवल अज़ीज़ुल हकीम

तर्जुमा: और हमने उन दूसरे लोगो के तरफ भी भेजा है जो अभी मुसलमानो के साथ लेकिन आइंदा वो ईमान लायंगे और बेशक अल्लाह तआला ग़ालिब और हिकमत वाला है|

4. ज़ालिका फज़लुल लाहि युअ’तीहि मय यशाअ वल लाहू ज़ुल फजलिल अज़ीम

तर्जुमा: यह अल्लाह का फ़ज़्लो करम है जिसे चाहते है अता करते है अल्लाह तआला बहुत फज़ल का मालिक है

5. मसलुल लज़ीना हुममिलुत तौराता सुम्म लम यहमिलूहा कमासलिल हिमारि यहमिलु अस्फारा बिअ,सा मसलुल कौमिल लज़ीना कज्ज़बू बिआयातिल लाह वललाहू ला यहदिल कौमज़ ज़ालिमीन

तर्जुमा: जिन जिन लोगो को तौरेत दिया गया है और उन्होंने उसको नहीं उठाया यानि उस पर अमल नहीं किया है उन लोगो की मिसाल उन गधो के जैसे ही है जो बहुत सारे किताबें लादे हुवे हों. कितनी बुरी मिसाल उन लोगो के लिए जिन लोगो ने अल्लाह तआला के आयतों को झूठलाया है और अल्लाह तआला जुल्म करने वालो को कभी भी हिदायत नहीं देते है.

6. कुल या अय्युहल लज़ीना हादू इन ज़अमतुम अन्नकुम अव्लियाउ लिल मिन दूनिन नासि फ़ तमन्नवुल मौत इन कुन्तुम सादिक़ीन

तर्जुमा:आप कह दीजिये : ए यहूदियों ! अगर तुम्हारा गुमान है कि तमाम लोगों को छोड़ कर तुम ही अल्लाह के दोस्त हो, तो अगर तुम सच्चे हो तो मौत की खवाइश करो

7. वला यता मन नौनहू अबदम बिमा क़द्दमत ऐदीहिम वल लाहु अलीमुम बिज़ ज़ालिमीन

तर्जुमा:यह लोग अपनी हरकतों की वजह से जो पहले कर चुके हैं कभी मौत की आरज़ू नहीं करेंगे और अल्लाह इन जालिमों से खूब वाकिफ हैं

8. कुल इन्नल मौतल लज़ी तफिररूना मिन्हु फ़इन्नहू मुलाक़ीकुम सुम्मा तुरददूना इला आलिमिल ग़ैबि वश शहादति फ़ युनबबिउकुम बिमा कुन्तुम त’अलमून

तर्जुमा:ऐ रसूल आप कह दीजिये की मौत से तुम भागते हो वो ज़रूर तो ज़रूर तुम्हारे सामने आकर रहेगी, फिर तुम उस खुदा की तरफ लौटा दिए जाओगे, फिर वो तुम्हारे किये हुए काम भी बता देगा

9. या अय्युहल लज़ीना आमनू इज़ा नूदिया लिस सलाति मिय यौमिल जुमुअति फ़स औ इला ज़िकरिल लाहि वज़रुल बैअ ज़ालिकुम खैरुल लकुम इन कुन्तुम त’अलमून

तर्जुमा: ए मुसलमानों ! जब जुमा के दिन नमाज़ के लिए अज़ान दी जाये तो खुदा को याद करो और उसकी तरफ़ दौड़ पड़ो और ख़रीद फ़रोख्त छोड़ दिया करो, अगर तुम समझ रखते हो तो तुम्हारे हक़ में बेहतर होगा

10. फ़इज़ा कुज़ियतिस सलातु फन तशिरू फ़िल अरज़ि वबतगू मिन फजलिल लाहि वज्कुरुल लाह कसीरल लअल्लकुम तुफ्लिहून

तर्जुमा:जब नमाज़ पूरी हो जाये तो अल्लाह की ज़मीन में फ़ैल जाओ, और अपनी रोज़ी तलाश करो और उस को कसरत से याद करते रहो ताकि तुम मुराद पाओ
11. व इज़ा रऔ तिजारतन औ लहवनिन फज्जू इलैहा व तरूका क़ाइमा क़ुल मा इन्दल लाहि खैरुम मिनल लहवि वमिनत तिजारह वल लाहू खैरुर राज़िकीन

तर्जुमा:और जब ये तिजारत या खेल तमाशा देखते हैं तो उस की तरफ दौड़ पड़ते हैं और तुमको खड़ा हुआ छोड़ दे,आप कह दीजिये कि जो कुछ अल्लाह के पास है, वो खेल तमाशा और खरीद फरोख्त से बेहतर है और खुदा सब से बेहतर रिज़्क़ देने वाला हैं.

सूरेह जुमा की खासियत

सूरा जुमा का शहुरुआत अल्लाह की शान बयां करने से शुरू होती है. इसके बाद सूरा जुमा में जुमा के दिन की एहमियत बयां की गई है. Surah Juma in hindi में कहा गया है कि जुमा का दिन मुसलमानों के लिए हफ्ता वार जशन है जिन्हे इस्पे अपनी दुनयावी मसरूफियत छोड़ कर अल्लाह की इबादत पे गौर गौर चाहिए. सूरा में यह भी कहा गया है कि जुमा की नमाज़ मुसलमानों के लिए ज़रूरी है। यह दुआ उनके एक साथ होने और अल्लाह के सामने एक साथ जाने का मौका है. सूरा में मुसलमानों को सलाह दी गई है कि वे जुमा के दिन की पाकिजिगी को समझे और इस दिन गुनाहो से दूर रहे और अच्छे से अच्छे काम करने की कोशिश करे।

(Surah Juma in Hindi)-सूरेह जुमा इस्लाम में एक एहम सूरेह है यह मुसलमानो को इनके मज़हब के अहम तरीन दिनों में से एक की एहमियत के बारे में याद दिलाता है और इस दिन का एहतेराम करने और इसे अल्लाह की इबादत के लिए वक़्फ़ करने का हुकम देता है.

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