22 Rajab Kunde Ki Niyaz- इमाम जाफ़रे सादिक नज़र की कहानी हिंदी में

22 Rajab Kunde Ki Niyaz- इमाम जाफ़रे सादिक नज़र की कहानी हिंदी में

माहे रजब का महीना बहुत ही खास मना जाता है माहे रजब का चाँद जब भी नज़र आता है ! तो हमारे मन में एक ख़याल जरूर आता है ! क्यूंकि यह महीना बहुत ही खास है, रजब का महीना बरकतों का महीना है इस महीने में किसी भी चीज़ का हिसाब नहीं है. आज पुरे दुनिया में रजब के महीने का इंतज़ार हर इंसान कर्ता है. इस महीने की खास नज़र में से एक नज़र कुंडे की नज़र है ( 22 Rajab Kunde Ki Niyaz)

22 Rajab Kunde Ki Niyaz

सवाल यह उड़ता है Kunde Ki Niyaz कब मनाया जाता है? और इनकी क्या खासियत है ?

इस महीने की खासियत ऐसी हैं कि जिसने इसकी बरकतों में और रहमतों में चार चांद लगा दिए हैं ऐसी कई खासियत महीने में मिलती है जिनमे-

  • एक तेरा रजब है जिसमें मौला ए मुतक्कियान अमीरल मोमिनीन हजरत अली अलैहिस्सलाम की विलादत हुई थी.
  • दूसरी खास बात 22 रजब जो की इमाम जाफर सादिक अली सलाम की नज़र से मशहूर है जिसे हर शख्स जो अल्लाह को एक मानता है वो इसे रोज़ी में बरकत के लिए ज़रूर करवाता है
  • और तीसरी खास बात है 27 रजब है
  • 22 रजब की रिवायत बड़ी पुरानी है आजसे करीब 20 बरस पहले तक जिन घरों में इमाम जाफर सादिक अली सलाम की नज़र की तैयार की जाती थी उसकी रसम यह थी कि घर की ख़वातीन और बच्चे पूरी रात जागते थे और नज़र के लिए टिकिया बनाते थे तब बहुत ही धूमधाम से और शौक से इस नियाज को तैयार किया करते थे लेकिन जमाने के बदलने के साथ-साथ यह पुरानी रवायत भी बदलता जा रही है कल तक जो नज़र घरों में तैयार होती थी निहायत पाकिज़गी की के साथ तैयार होती थी जमाने के बदलने के साथ-साथ इसमें भी बदलाव आ गया है अब यह नज़र का सामान रेडीमेड आता है और इमाम जाफर सादिक अली सलाम के नाम पर नजर दी जाती है यह नजर सुबह के वक्त नमाजे सुबह के बाद होती है और नमाजे सुबह के बाद जब नजर हो जाती है तो मोहल्ले के तमाम हजरात एक दूसरे के घरों में जाते हैं दुरूद पढ़ते हैं यह सिलसिला पूरे दिन चलता रहता है .

22 Rajab Kunde Ki Niyaz- वाकिया

कूड़ा कहा जाता है अगर इसकी शरी हैसियत को देखा जाए तो किताबें अल खराज वल जराए और तस्करतुल मासूमीन में इमाम जाफर सादिक अलैहिस सलाम की करामात और मोजिज़ात को ख़ूबसूरती से जिक्र किया गया है वहां पर इसका कुछ सुराग मिलता है जब इमाम के चाहने वाले ने खिदमत में आकर इमाम अली सलाम से अपना दुखड़ा बयान किया तो इमाम ने उसके लिए दुआ की तारीख लिखती है कि वह चाहने वाला चला गया और उसकी मुश्किल हल हो गई उस शख्स ने इस खुशी में एक नजर की कुंडे में नजर को रखा और मस्जिद में ले जाकर नमाजियों को खिला दिया जब लोगों ने इसका रीजन पूछा और तफ़्सीर जानने की कोशिश की तो उसने कहा कि मैं फ़रज़न्दे रसूल इमाम जाफर सादिक अली सलाम से अपनी मुश्किल बयान की थी उन्होंने दुआ कर दी है और वह मेरी मुश्किल हल हो गई है उसी की खुशी में मैं यह नजर दिला रहा हूं यह वाक्या पूरे शहर में मशहूर हो गया और फिर लोग इमाम के नाम पर नजर दिलाने लगे और तारीख लिखती है कि उसके बाद से जब भी कोई इस नियत से इस नजर को दिलाता था उसकी मन्नत जरूर पूरी होती थी

इमाम जाफ़रे सादिक नज़र की कहानी हिंदी में-

किसी शहर में एक गरीब इंसान लकड़ियाँ काट के बड़ी मुश्किल से अपना गुजारा करता था यहां तक के दिन-ब-दिन उसे पर कर्ज चढ़ता रहा एक दिन उसने अपनी बीवी से कहा क्यों ना मैं किसी दूसरे शहर जाकर काम ढूंढो मेहनत करूं ताकि हमारा कर्ज उतर जाए और हमारे हालात बेहतर हो जाए बीवी ने कहा अगर आपकी यही मर्जी है तो मैं आपके लिए दुआ करुंगी यकीनन अल्लाह हमारी मदद फरमाएगा वह दूसरे शहर गया काम ढूंढा लेकिन काम ना मिला और वही लकड़ियाँ काट के गुजारा करता रहा कि कुछ पैसे इकट्ठे कर लूं फिर घर जाऊंगा लेकिन उसकी बीवी दिन रात रोती रहती थी जब घर में कुछ ना बच्चा तो गुजर सफर करने के लिए शहर के वजीर के पास गई और कहा मैं गरीब लाचार हूं मुझे अपने घर में थोड़ी सी जगह दे दो तुम्हारे घर का काम करती रहूंगी मुझे बस दो वक्त का खाना दे देना वजीर ने अपनी बीवी से कहा इसे घर में रख लो और नौकरों के साथ कोई काम समझा दो वह मजबूर औरत काम करती रही और अपने शहर के लिए दुआ करती रही दिन महीना में गुजरे और महीने साल की तरफ बढ़ने लगे लेकिन उसका शौहर ना आया एक रात जब रोती रोती सो गई और ख्वाब में इमाम जाफर सादिक अलैहिस सलाम आए और ईमाम फरमा रहे हैं ऐ लोगों बताओ आज तारीख कौन सी है ईमाम के साथ जो ईमाम के चाहने वाले थे उनमें से किसी ने कहा आज 22 रजब है इमाम ने फरमाया ए लोगो याद रखना जब कोई हमारे चाहने वाला इस रात खुलूसे दिल से हमारी नजर दिलाएगा और अल्लाह से हमारे सदके से दुआ मांगे तो अल्लाह वो रद नहीं करता यह सुनते ही औरत की आंख खुल गई वह सुबह उठकर इमाम जाफर सादिक अली सलाम की नियाज़ में लग गई नियाज़ बनाई दुआ मांगी यह अमल चल ही रहा था वह नियाज़ बांट ही रही थी दूसरी तरफ उसका शौहर लकड़ियाँ काट रहा था लकड़ियाँ काटते
काटते जब वह एक रात जमीन पर गिरा वह देखता क्या है की उसकी जड़ों में खज़ाना छुपा हुआ था वह खज़ाना देखकर बहुत खुश हुआ और अल्लाह का शुक्र अदा करने लगा वह खज़ाना लेकर अपने घर वापस आ गया अपनी बीवी को लेकर एक शानदार महल बनवाया और दोनों खुशी से रहने लगे बीवी ने शोोहर से कहा यह जो करम हुआ है यह सब इमाम जाफर सादिक अली सलाम का सदका है ईमाम मेरे ख्वाब में आए थे उन्होंने कहा इस रात नियाज़ बनाकर अल्लाह से हमारे लिए दुआ मांगो तुम्हारे हालात बदल जाएंगे वह दोनों मियां बीवी हर साल इमाम जाफर सादिक अली सलाम की नियाज़ बनाया करते थे एक दिन वजीर की बीवी छत पर गई दूर से देखा एक बड़ा आलीशान घर नजर आया अपनी कनीज़ से पूछा यह घर इतना आलीशान बना है यह घर किसका है?

कनिज़ो में से एक कनीज ने कहा है शहजादी यह आपकी उस कनीज़ का महल है जो कुछ बरस पहले आपकी कनीज़ थी शहजादी ने कहा इतना बड़ा महल कैसे बना ? जाओ उसे बुला के मेरे पास ले आओ कनीज़े जाती है उस औरत को बुला कर लाती हैं वह औरत इमाम जाफर सादिक अली सलाम का पूरा वाक्या खुलूसे नियत से शहजादी को बताती है.
इमाम ने कहा था इस तारीख में मेरी नजर करो मैंने खुलूसे दिल से नजर की अल्लाह ने हमें नवाज दिया वह दिल ही दिल में कहने लगी इससे बड़ा झूठ मैंने कभी नहीं सुना यकीनन इसके शोोहर ने कहीं से चोरी की होगी और यह कहानी बना रही है वह औरत चली गई लेकिन वजीर की बीवी के दिन बदलने लगे अचानक नए वजीर ने जो वजीर के लिए हसद रखता था उसने बादशाह को भड़काना शुरू कर दिया और बादशाह ने वजीर को बुला के पूरा हिसाब मांगा वजीर जब हिसाब देने लगा तो हिसाब सही से दे ना पाया नए वजीर ने कहा मैंने आपको कहा था ना यह आपके पीठ पीछे आपको नुकसान पहुंचता है बादशाह ने वजीर को महल से निकाल दिया और कहा अब तुम महल में नहीं रहोगे जाओ अपने लिए कोई और काम ढूंढो.

वह वजीर अपनी बीवी को लेकर शहर से बाहर जा ही रहा था के रास्ते में दोनों को भूख लगी उन्होंने तरबूज खरीदा और उसे किसी कपड़े में बांध दिया और कहा किसी किनारे पे बैठ के खाएंगे और वहां बादशाह का बेटा जो शिकार पर गया था वह सुबह से लेकर शाम तक घर न पहुंचा नए वजीर ने कहा मुझे लगता है उस वजीर को अपने निकला है कहीं उसने शहजादे को नुकसान तो नहीं पहुंचा बादशाह को गुस्सा आया और कहा जाओ उस वजीर को पकड़ कर लाओ अगर उसने मेरे बेटे को नुकसान पहुंचा तो मैं उसे नहीं छोडूंगा सिपाही वजीर के पास आए और पूछा शहजादा कहां है उसने कहा मुझे क्या पता सिपाहियों ने वजीर और उसकी बीवी को बादशाह के सामने पेश किया बादशाह ने कहा इस कपड़े में क्या है उसने कहा तरबूज है बादशाह ने कहा इसे खोलो कपड़ा खुला उसमें शहजादे का सर था बादशाह की आंखों में खून उतर आया बादशाह ने कहा इस वजीर और इसकी बीवी को कैद कर दो सुबह होते ही इन दोनों के सर को तन से जुदा कर देंगे वजीर रोता रहा कि मैंने कुछ नहीं किया लेकिन बादशाह ने कुछ ना सुना दोनों कैद खाने में रो रहे थे वजीर कहता रहा अचानक इतना सब कुछ बुरा क्यों हो गया मेरे साथ यकीनन मुझसे कोई गुनाह हुआ है जिसकी मुझे सजा मिली है इतने में वजीर की बीवी रोने लगी और रो-रो कर कहने लगी बुरा तुमसे नहीं मुझसे हुआ है तुम्हें याद है हमारे घर एक नौकरानी हुआ करती थी वह कल मेरे पास आई थी आज वह शहजादी की तरह रहती है मैंने पूछा यह पैसे कहां से आए उसने कहा इमाम जाफर सादिक अली सलाम ख्वाब में आए उन्होंने कहा मेरी नजर दो और फिर दुआ मांगो अल्लाह तुम्हारे हालात बदल देगा मैंने उसे झूठा समझ मुझे लगता है तब से हमारे हालात बदल चुके हैं वजीर ने कहा इससे बड़ा गुनाह क्या होगा कि तुमने इमाम के नाम के मोजिज़ा पर शक किया तोोबा करो और दोनों तौबा करने लगे और यह दुआ की क्या परवरदिगार हमको कैसे रिहाई मिली तो हम हर 22 रजब को इमाम जाफर सादिक अली सलाम के नियाज बनाया करेंगे यह दुआ मांग के रो रो के सो गए.

सुबह का सूरज तुलु हुआ शहजादा घूमता फिरता अपने महल पहुंचा बादशाह शहजादे को देखकर हैरान हो गया और कहने लगा तुम कहां थे शहजादे ने कहा मैं शिकार पर था बादशाह हैरात से पूछने लगा फिर वह सर किसका था जाओ वजीर और इसकी बीवी को बुलाओ वजीर और उसकी बीवी आई उन्होंने पूरा वाक्या बादशाह को सुनाया बादशाह ने जब इमाम जाफर सादिक अली सलाम का नाम सुना और उन्होंने भी कहा आज से हर 22 रजब को जहां-जहां मेरी सल्तनत है वहां वहां इमाम जाफर सादिक अली सलाम का नियज़ किया जाएगा और वजीर को अपने उहदे पर कायम कर दिया और नए वजीर को अपनी सल्तनत से निकाल दिया सलाम हो हुज्जते खुदा हजरत इमाम जाफर सादिक अल इस्लाम पर.

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