प्रदूषण पर निबंध (Essay on Pollution in Hindi)

प्रदुषण आज के समय में एक बहुत बड़ा वैश्विक समस्या बन चूका है। इसने हमारी पृथ्वी को पूरी तरह से बदल दिया है। दिन प्रति दिन यह प्रदुषण हमारी पृथ्वी पे फैलता जा रहा है जो हमको भी धीरे धीरे नुक्सान पंहुचा रहा है। इसे रोकने के लिए हम सभी के योगदान की ज़रूरत है। हमने अपने इस पोस्ट (Essay on Pollution in Hindi) में आपके लिए प्रदुषण के बारे में सारी जानकारी दी है। प्रदुषण पर निबंध (Essay on Pollution in Hindi) से सभी छात्र को प्रदुषण को कैसे कम करे इसके जानकारी मिलेगी। इस लेख में आपको मिलेगा प्रदुषण किसे कहते है, प्रदुषण कितने प्रकार का होता है, प्रदुषण को कैसे रोके, प्रदूषण एक ग़ुबार, गाँव का प्रदूषण, शहरों का प्रदुषण। इस आर्टिकल की मदद से आप (Essay on World Environment Day) के बारे मे भी लिख सकते है। यह पोस्ट उन छात्रों के लिए है जिन्हे हिंदी में निबंध लिखने में परेशानी होती है। उनके लिए (पर्यावरण पर निबंध) एक साधन है निबंध लिखने के लिए।

essay on Pollution in hindi

प्रदूषण पर निबंध (Essay on Pollution in Hindi):

प्रस्तावना – प्रदुषण क्या होता है?

प्रदुषण उसे कहते है जो हमारी प्रकृति को हानी पहुँचाती है। प्राकृतिक सन्तुलन में होने वाले दोष (तरल या गैस या ठोस ) या किसी ऊर्जा जैसे गर्मी, धवनि जैसे हानिकारक रूप से फैलने वाले स्तर को प्रदुषण कहते है। प्रदुषण हर एक जीव जंतुओ को नुकसान पहुँचता है।

प्रदूषण एक ग़ुबार: वर्त्तमान स्तिथि :

प्रदुषण का गुबार हर तरफ छाया हुआ है। शहरों से लेकर गावो तक हर जगह प्रदुषण की वजह से सास लेने में परेशानिया होती है। प्रदुषण का गुबार धरती के अंचल में फैल चूका है। वो धरती जो कभी प्रदुषण से मुक्त था लेकिन आज उसी आँचल में प्रदुषण का धुआँ आचल को काला कर दिया है। आज प्रदुषण ने हमें क्या क्या दिया है, पहले जिस हवा में खुशबू थी आज उसी हवा में घुटन महसूस हो रही है। वो पानी जिसमे पहले मिठास थी आज उस पानी में ज़हर मिल चूका है। लेकिन अफ़सोस यह सब हमने ही प्रकृति को तोहफे में दिया है।

प्रदुषण के प्रकार :

हर साल गर्मी और सर्दी के मौसम में बदलाव आता है। जिसकी वजह से हवा दूषित हो जाती है। भारत के कई राज्य पूरी तरहा से प्रदूषित हो से भारत की राजधानी दिल्ली का पहला नंबर होता है। वातावरण प्रदूषित होने के कारण यहाँ सास लेना मुश्किल हो जाता है। जिससे कई तरह की बीमारिया पैदा हो जाती है। प्रदुषण को बढ़ने में कई कारण होते है जिनमे से कुछ ऐसे कारण-

वायु प्रदुषण : वायु का दम घुटना

वायु प्रदूषण सबसे खतरनाक प्रदुषण है। यह प्रदुषण महानगरो में ज़्यादा फैला हुआ है। शहरों में सीना चीरती हुई ऊंची ऊंची इमारते, फर्राटे भरते हुए मोटर वाहनो का भयंकर काला धुआँ, कारखानों से निकलता हुआ कोयले का गुबार, प्लास्टिक और टायरों का खुले में जलाना, ज्वाला मुखी से निकलने वाले गरम हवा से वायु प्रदुषण बढ़ता जा रहा है। जिससे अस्थमा दमा, स्किन इन्फेक्शन, आँखों की रौशनी पे असर होने जैसी बीमारी बढ़ती जा रही है। सर्दियों में वायु प्रदूषण बढ़ जाता है जिसकी वजह से कोहरे का गुबार छा जाता है। और वही कोहरा आँखों में दर्द पैदा करता है।

जल प्रदुषण : जल की ज़हरीली लहर

जल को दूषित करने वाला कारखाने का गन्दा पानी, घरेलू कचरा, नॉन बीओडिग्रेडिबल कचरे, प्लास्टिक पदार्थ सब नदियों में समां रहे है जिस्से आज नदियों का नीला पानी मटमैला होता जा रहा है। इसे इस्तेमाल करने से बीमारिया फ़ैल रही है।

भूमि प्रदुषण : भूमि पे प्लास्टिक का जाल

धरती की मिट्टी धीरे धीरे प्लास्टिक से ढकती जा रही है। प्लास्टिक का जाल सड़को से लेकर खेतो तक पहुंच रहा है। जो हरी सब्ज़ी और फल को भी ज़हरीली बना रही है। जिसकी वजह से किसान को कृषि करने में भी परेशानिया आ रही है ,और इसका ज़हर जड़ो तक पहुंचने पर यह पेड़ो का दम घोट रही है। यह सब हमारी लापरवाही की वजह से बढ रहा है। जिसे वक़्त पे ही रुकना पड़ेगा।

ध्वनि प्रदूषण : कानो का दर्द

ध्वनि प्रदूषण बढ़ाने में भी हमारा बड़ा योगदान होता है। सडको पे मौजूद बड़ी संख्या में वाहन , ज़ोर ज़ोर से हॉर्न बजाना, कारखानों से निकलने वाली तेज़ आवाज़े, पटाको से निकलने वाले आवाज़े, लाऊड स्पीकर से निकलने वाली आवाज़े। यह सब ध्वनि प्रदुषण का कारण है। हम सभी को रहने के लिए शांत वातावरण चाहिए होता है। तेज़ आवाज़ से कानो में पैदा होने वाली बीमारी काफी खतर नाक साबित होती है। और बहरापन होने पे मजबूर कर देती है।

प्रकाश प्रदुषण :

अधिक से ज़्यादा लाइट का इस्तेमाल करना, बढ़ती हुई गढ़ियो में लगने वाली तेज़ वाल्ट की लइटे, एक से ज़्यादा बल्ब का इस्तेमाल करना। यह प्रकाश प्रदुषण का करड़ होते है। जिसकी वजह से होता है,आँखों की रौशनी काम होती है और दिमाग पे असर पड़ता है।

प्रदुषण को कैसे कम करे? (Essay on Pollution in Hindi)

प्रदुषण को कम करने का समाधान है जागरूकता जब तक हमारे अंदर जागरूकता नहीं होगी प्रदुषण को कम नहीं किया जा सकता। जागरूकता को ज़्यादा से ज़्यादा फैलाना चाहिए ताकि सब इससे वाकिफ (अपरिचित) हो सके।

  • प्रदुषण को कम करने में ज़्यादा से ज़्यादा पेड़ लगाए जाए। पेड़ो को काट देने से मौसम में बदलाव आता है।
  • पटाको को जलाने से बचे।
  • वाहनों का इस्तेमाल ज़रुरत पड़ने पे ही करे, आने जाने के लिए सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल करे।
  • यह हमें खुद ही समझना होगा कि प्रकृति को नुकसान पहुंचने से आगे आने वाली समस्या का समाधान मिलना मुश्किल हो जाएगा। इसी लिए इसे अनदेखी न करते हुए कदम को आगे बढ़ाया जाए और कई बदलाव किये जाए जिससे प्रदूषण कम करने में मदद मिले जैसे प्लास्टिक का इस्तेमाल न करे जिससे उसका उत्पादन कम हो सके और उससे प्रकृति को कोई नुकसान न पहुचे, गाँव को ज़्यादा से ज़्यादा बचाए ताकि उसकी खुशबू और हरयाली बरकरार रहे।

गाँव का प्रदूषण :

गाँवो यूतो हरियाली से भरा होता है। गाँवो में प्रदुषण शहरों की तुलना में कम है लेकिन आज गाँवो को काट के ख़तम किया जा रहा है जिससे उसकी हरियाली, और ख़ुशूबू भी ख़तम होती जा रही है। गाँवो में आज बहुत तेज़ी से शहरीकरण किया जा रहा है। जितने भी खेत है उनको उजाड़ के मकान बना दिए जा रहे है। जिससे प्रदुषण बढ़ने का खतरा बढ़ता जा रहा है।

शहरों का प्रदुषण :

शहरों में वाहन का इस्तेमाल बहुत होता है जिससे निकलने वाला ज़हरीली धुआँ बहुत हानिकारक होता है। शहरों मे लोगो से ज़्यादा वहान चलते है जो एक समस्या का कारण है। कारखानों से निकलने वाले धुए सास की बीमारी की वजह है, हमारे घर से निकलने वाले कचरे नालियों मे इकठा होते है जोकि गलते नहीं और धरती में समाते जा रहे है। इन सब वजहों से प्रदुषण बढ़ता जा रहा है जिसे हमें कम करने की ज़रुरत है।

सरकार की पहल वायु प्रदुषण की ओर : (Essay on Pollution in Hindi) :

सन 2019 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने दिल्ली में एक बैठक बैठैठी जिसमे विश्व स्वास्थ संगठन जैसे कई संगठनो को शामिल किया। उसमे जलवायु प्रदुषण को सबसे आगे रखा गया। क्युकी हर 10 में से 9 व्यक्ति को इस प्रदूषित हवा से नुकसान पहुंच रहा था। जिनमे मौत की संख्या 70 लाख से ज़्यादा 5 से 6 लाख बच्चे भी है। सरकार ज़्यादा से ज़्यादा aware हो और हर नागरिक को अग्र करे की वो भी ज़्यादा से ज़्यादा इसमें योगदान दे। ताकि आगे 2030 तक जलवायु और वायु प्रदूषण पर रोक की जा सके। देश में सबसे ज़्यादा प्रदूषित शहरों में से नंबर एक पे देश की राजधानी देल्ही है, जो population के साथ साथ प्रदुषण में भी आगे रहता है, दूसरे नंबर पे है बिहार की राजधानी पटना, लेकिन वही सबसे साफ़ और fresh हवा मिज़ोरम में मिलती है। यह सुनके ताज्जुब होगा की 10 सबसे प्रदूषित शहरों में से 7 ज़िले दिल्ली और बिहार से है।

  1. दिल्ली
  2. पटना
  3. मुजफ्फरपुर
  4. फरीदाबाद
  5. नोएडा
  6. ग़ज़ियबाद
  7. मेरठ
  8. नलबारी
  9. आसनसोल
  10. ग्वालियर

निष्कर्ष:

हमारी हर सांस बहुत कीमती है अगर हमें अच्छी हवा नहीं मिलेगी तो हमे सास लेने में बहुत परेशानी देखने को मिलेगी। प्रदुषण जैसी समस्या को नज़र अंदाज़ न करे बल्कि इसका समाधान ढूंढे। हमे आज ही जागना होगा ताकि हम इसे आसानी से कम कर सके। प्रकृति के साथ हाथ मिला के, स्वस्थ और सुरक्छित भविष्य के बारे में सोचे। हमारा पास बहुत ऐसे उपाए है जिससे हम प्रदुषण को कम कर सकते है। इसके लिए हम एक जुट होना पड़ेगा और कदम उड़ाना पड़ेगा। हम प्रकृति को बचा सकते है। इसे बचाए, नाकि गवाए।

यह ब्लॉग पोस्ट आपके लिए एक साधन है जिससे आप एक अच्छी शुरुआत कर सकते। इसे जुडी हुई बातो को साँझा करने के लिए आप हमारे कमेंट बॉक्स में हमे लिख सकते है। मुझे यकीन है की हमारी इस पोस्ट से आपको निबंध लिखने में सहायता मिलेगी बल्कि इसकी मदद से और लोग भी जागरूक होगे। और हर किसी को प्रेरित भी करेगा।

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