Shab e Barat Ki Namaz, Wazifa in Hindi- शबे बारात के अमाल सुन्नी और शिया मुसलमानो के लिए-

शबे बरात मुसलमानो का इबादत और तिलावत का त्योहार है जो की इस्लामिक केलेन्डर के हिसाब से शबरात महीने के 14 की रात में मनाई जाती है। शबे बरात की रात रेहमत की रात मानी जाती है इस लिए इस दिन हर मुसलमान रात भर जाग के नमाज़ और क़ुरान की तिलावत करते है। हमारी आज कि इस पोस्ट में आपको (shab e barat ki nafil namaz in hindi) के बारे में डिटेल जानकारी मिलेगी। और इस दिन की फ़ज़ीलत (Shab e Barat Ki Fazilat) के बारे में भी बताया गया है। इस पोस्ट में हमने आपके लिए आसान तरीके से नमाज़ का तरीक़ा, (Shab e Barat Ki Fazilat), Shab e Barat 2024 में कब है। इन सब के बारे में हिंदी में बताया है ताकि वो लोग जो उर्दू, या अरबी में नहीं पढ़ सकते वो इस पोस्ट के ज़रिये से शबे बरात के दिन नमाज़ को आसानी से पढ़ सकते है।

shab e barat namaz in hindi

Shab e Barat ki Nafil Namaz in Hindi- शबे बारात के अमाल सुन्नी मुसलमानो के लिए –

Shab e Barat Ki Fazilat

शबे बरात के दिन हर घरो को साफ़ किया जाता है और रात में लइटे लगाई जाती है। पकवान बनाए जाते है। मस्जिदे और कब्रिस्तान को सजाया जाता है। हलवा और खाना बना के मुर्दो को फातेहा दी जाती है। कहा जाता है कि इस रात घर के मुर्दे साल भर पे घर में आते है, इस लिए इस रात घर को खोल दिया जाता है। क़ुरान और दुआओ की तिलावत की जाती है। रात भर जगा जाता है। शिया समुदाए के लोग मानते है की इस रात इनके आखिरी इमाम (इमाम मेहँदी) पैदा हुए थे. इस लिए उनकी ख़ुशी में 15 शाबान की सुबह में दरिया (नदी) के पास जाके, अरीज़ा डालते है और अपनी मुरादो को मानते है।

शब ए बारात 2024 की तारीख कब है? Shab e Barat 2024

शबे बारात इस्लामिक केलिन्डर के हिसाब से 8 वे महीने की 14 तारिख को होता है। शब् रात पूरी दुनिया में मनाया जाता है। हर मुल्क में चाँद के हिसाब से अलग अलग तारिख में मनाया जाता है। इस साल इंडिया में 2024 में रजब के चाँद की 29 के हिसाब से 24 february (saturday) को होगी और रजब के चाँद की 30 के हिसाब से 25 february (sunday) को होगी। इस रात अल्लाह से दुआ मांगिये और इबादत में रात गुज़रिये।

शबे बरात नफिल नमाज़ | Shab e Barat Ki Nafil Namaz in Hindi –

नमाज़ पढ़ने से पहले सबसे ज़रूरी है पाक और साफ़ होना। किसी भी अमाल को करने से पहले गुसल कर लीजिये ताकि सारी नजासत दूर हो जाए और आप पूरी तरह से पाक और ताहिर हो जाइये। शबे बरात नफिल नमाज़ का तरीक़ा हिन्दी मे पेश किया जाता है।

शबे बरात नफिल नमाज़ की नियत | Shab e Barat Namaz Ki Niyat Hindi Me –

किसी भी नमाज़ को पढ़ने से पहले सबसे ज़रूरी होता है नियत करना जो इस तरह से की जाती है।

“नियत मैं करता/करती हु शबे बारात की नफल नमाज़ की खास वास्ते अल्लाह तआला के मुँह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाह हो अकबर “

शबे बरात नफिल नमाज़ का तरीक़ा | Shab e Barat namaz ka tariqa –

सबसे पहले मगरिब की नमाज़ मुकम्मल करे।
फिर खड़े होकर 6 रकत नमाज़ पढ़नी है 2x 2 रकत करके।
उसके बाद नामज़ की नियत करे जो ऊपर बताई गई है।

पहली 2 रकत नमाज़ की नियत-
नियत की मैंने 2 रकत नमाज़े नफ़ल दरजए उमरी के लिए।
वास्ते अल्लाह तआला के।
मुँह मेरा काबा शरीफ की तरफ।
अल्लाह हो अकबर।
(हर 2 रकत के बाद सूरेह यासीन पढ़ने की बहुत फ़ज़ीलत है)

दूसरी 2 रकत नमाज़ की नियत-
नियत की मैंने 2 रकत नमाज़े नफ़ल आफत
और बालाओ से मेहफ़ूज़ रहने के लिए।
वास्ते अल्लाह तआला के।
मुँह मेरा काबा शरीफ की तरफ।
अल्लाह हो अकबर।
(हर 2 रकत के बाद सूरेह यासीन पढ़ने की बहुत फ़ज़ीलत है)

तीसरी 2 रकत नमाज़ की नियत-
नियत की मैंने 2 रकत नमाज़े नफ़ल रिस्क के लिए।
वास्ते अल्लाह तआला के।
मुँह मेरा काबा शरीफ की तरफ।
अल्लाह हो अकबर।
(हर 2 रकत के बाद सूरेह यासीन पढ़ने की बहुत फ़ज़ीलत है)
नमाज़ से फारिग होकर 21 मर्तबा सूरेह इखलास पढ़े।

ईशा की नमाज़ के बाद-

कुल 46 रकत नमाज़ पढ़ना है जिसे अलग अलग करके पढ़ना है।

पहले 2 रकत नमाज़ पढ़ना है जिसका तरीक़ा है –
हर रकत में सूरेह हम्द के बाद 1 बार आयतुल कुर्सी, 3 बार कुल्होवल्लाह अहद पढ़े।

2 रकत नमाज़ पढ़ना है जिसका तरीक़ा है –
हर रकत में सूरेह हम्द के बाद 1 बार आयतुल कुर्सी, 15 कुल्होवल्लाह अहद पढ़े।
फिर सलाम के बाद 100 मर्तबा दुरूद शरीफ पढ़े।

4 रकत नमाज़ 2×2 करके पढ़े –
हर रकत में सूरेह हम्द के बाद 5 बार कुल्होवल्लाह अहद पढ़े।

12 रकत नमाज़ 2×2 करके पढ़े –
हर रकत में सूरेह हम्द के बाद 10 बार कुल्होवल्लाह अहद पढ़े।
12 रकत होने के बाद 10 मर्तबा कलमए तौहीद, 10 मर्तबा कलमए तम्जीद,10 मर्तबा दुरूद शरीफ।

14 रकत नमाज़ 2×2 करके पढ़े –
हर रकत में सूरेह हम्द के बाद जो सूरेह याद हो वो पढ़े। फिर दुआ मांगे।

4 रकत नमाज़ एक सलाम के साथ पढ़े-
हर रकत में सूरेह हम्द के बाद 50 बार कुल्होवल्लाह अहद पढ़े।

8 रकत नमाज़ एक सलाम के साथ पढ़े-
हर रकत में सूरेह हम्द के बाद 11 बार कुल्होवल्लाह अहद पढ़े।
फिर अपने गुनाहो की माफ़ी मांगे।

शबे बारात की दुआ | Shab e Barat dua

“अल्लाहुम्मा सल्ले अला सय्येदिना मुहम्मदिव व अला आलि सय्येदिना मुहम्मदिन कमा सललेता अला सय्येदिना इब्राहिम व अला आलि सय्यदीना इब्राहिम इन्नक हमीदुम मजीद अल्लाहुम्मा बारिक अला सय्येदिना मुहम्मदिव व अला आलि सय्येदिना मुहम्मदिन कमा बारकता अला सय्येदिना इब्राहिम व अला आलि सय्यदीना इब्राहिम इन्नक हमीदुम मजीद”

दुआए निस्फ़ शाबान –

बिस्मिल्ला हिर्रहमान निर्रहीम

अलाहुम्मा या जल मन्नि वला यमुत्रु अलैहि या जलजलालि वल इकराम।

या जत्तोलि वल इनआम ला इलाहा इला अन्ता ज़हरल्लाजीन।

वजारल मुस्तजिरीन व अमानल खाइफीन।

अल्लाहुम्मा इन कुन्ता कतब तनी इन्दका फी उम्मिल किताबि शकीय्यन

औ महरूमन ओं मतरुदन औ मुक़त्तरन अलय्या फिरिज्क़।

फ़म्हु अल्लाहुम्मा बि फ़दलिका शकावती व हिरमानी व तर्दी वक तितारि रिज़्क़ी।

व सबितनी इन्दका फी उम्मिल किताबि सईदम मरजूकम मुवफ्फक़ल लिलखैरात।

फ इन्नका कुल्ता व कौलुकल हक़्क़ फी क़िताबिकल मुन्जल।

अला लिसानि नबीय्यिकल मुरसल यम्हुल्लाहु मा यशाउ वयूस्बितु व इन्दहू उम्मुल किताब।

इलाही बीतजल्लि यिल अअज़म।

फी लैलतिन्निस्फे मिन शहरि शअबानुल मुक़र्रमल्लती युफ़ रकु फीहा कुल्लु अमरिन हकीमिंव व युबरम।

अन तकशिफा अन्ना मिनल बलाइ वल बलवाई मा नअलमु वमाला नअलम वमा अन्ता बिही अअलम।

इन्नका अन्तल अअज़्ज़ुल अकरम।

वसल्ललाहो तआला अला सय्यिदिना मुहम्मदिव व अला आलिही व सहबिहीँ व सल्लम 0

वल हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन।

शबे बरात के अमाल शिया भाइयो के लिए – (Shabe Barat Amaal Shia Musalmano Ke Lie) –

Shab e Barat Ki Fazilat

इमाम जाफ़रे सादिक़ अ.स इस नमाज़ के बारे में बतात्ते है। यह रात वो है जिसमे दुआ क़ुबूल होती है, गुनाहे माफ़ होती है। इंसान अगर यह छोटा सा अमल करता है तो वो इस रात का सबसे बेहतरीन अमल करता है। रेहमते परवरदिगार उसपे नाज़िल होती है। यह रात शब्बे दारी की रात है। इस रात जाग के क़ुरान और दुआ की तिलावत की जाती है। यह रात मुर्दो के लिए अपने घर वापस आने की रात होती है इस लिए इस रात अपने मुर्दो को ज़्यादा से ज़्यादा नज़र करे ताकि उनकी रूह आपसे खुश रहे। और आपको हमेशा परवरदिगार की बारगाह से दुआए देते रहे। मुर्दे हमारे बिच तो नहीं होते लेकिन वो हमे हमेशा परवरदिगार की बारगाह से देखते रहते है। और जब भी उनका चाहने वाला परेशान होता है तो मुर्दे भी परेशां हो जाते है और रब से दुआ करते है की मेरा चाहने वाला परेशां है इसकी परेशानी दूर करिये। इस लिए यह रात खास तौर से अपने मरहुमीन के लिए दुआए मग़फ़ेरत करिये और सवाबे दा रैन हासिल कीजिये।
घरो को रोशन कीजिये, मस्जिदे और क़ब्रिस्तानो में जाके मोमबत्तिया जलाइए।

शबे बारात के 10 एहम अमाल | Shabe Barat Ke 10 Amaal –

10 अमल ऐसे है जिन्हे इस्लाम में बताया गया है। जिसे अल्लामा फ़िदा हुसैन अपने लेक्चर में भी बताते है। तो आइये नज़र डालते है 10 ऐसे खास अमल पे जिनको पढ़ने का सवाब बहुत होता है।

  1. सबसे पहले ग़ुस्ल करे ताकि आप पूरी तरह से पाक व ताहिर हो जाए।
  2. इस रात शब्बे दरी करे जिसका सवाब बहुत है।
  3. ज़ियारते इमाम हुसैन ज़रूर पढ़े। (2 रकत नमाज़ हदिये इमाम हुसैन पढ़ने का बहुत सवाब है )
  4. इस रात ज़्यादा से ज़्यादा सलवात पढ़े।
  5. दुआए कुमैल पढ़े।
  6. 100 मर्तबा तस्बीहाते अरबा पढ़े।
  7. नमाज़े ईशा के बाद २ रकत पढ़ना है। (जिसका ज़िकर निचे किया है )
  8. नमाज़े जाफ़रे तय्यार पढ़ना।
  9. 4 रकत नमाज़ पढ़े हर रकत में सूरेह हम्द के बाद 100 मर्तबा सूरेह तौहीद की तिलावत।
  10. 100 रकत नमाज़ पढ़े हर रकत में सूरेह हम्द के बाद १०मर्तबा सूरेह तौहीद की तिलावत करे।
    और भी दुआए है जो आप तुहफ़तुल अवाम से पढ़ सकते है। जो अमाल ऊपर बताए गए है वो मुकम्मल अमाल है।
    यह रात बहुत ही अफ़ज़ल रात है। इस अमाल को करने से परवरदिगार इस रात के तुफैल में आपके गुनाहो को माफ करेगा और आपको

शबे बरात की नमाज का तरीका – Shabe Barat Namaz Ka Tariqa –

इमाम जाफ़रे सादिक़ अ.स फरमाते है की जब आप नमाज़े ईशा से फारिग हो जाए तब 2 रकत नमाज़ पढ़े। नियत यह करे-
में 2 रकत नमाज़ पढता हु शबे बरता की क़ुर्बतन इल्लाह।

तरीक़ा यह है –
पहली रकत में सूरेह हम्द के बाद एक मर्तबा सूरेह काफ़िरून पढ़ना है।
दूसरी रकत में सूरेह हम्द के बाद एक मर्तबा सूरेह तौहीद की तिलावत करना है।
नमाज़ पूरी करने के बाद तस्बीह ज़रूर पढ़े।

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